Gonda News:बिन बारातियों के दूल्हे दुल्हन ने रचाई शादी,कोरोना काल में अनावश्यक भीड़ न जुटाने का दिया संदेश

मंदिर में निभाई गयी शादी की रस्में,खुद रेशमी ने पुलिस से शादी की ली थी अनुमति

राम नरायन जायसवाल

गोण्डा। कोरोना संक्रमण के दौरान सम्पन्न हो रहे शादी मुंडन आदि मांगलिक आयोजनों में जुटाने वाली भींड़ के आयोजकों के लिए वर वधू ने बिना बारातियों व घरातियों के शादी सम्पन्न कराकर नसीहत पेश की है।

वजीरगंज थानाक्षेत्र में सोमवार को सम्पन्न हुई शादी में जहां बाराती में केवल दूल्हे के पिता शामिल रहे तो घरातियों में दुल्हन की मां और बाप रहे जिन्होंने पूरी जिम्मेदारी संभाली।एक तरीके से बिना बारातियों व घरातियों के संपन्न हुए इस अनूठी शादी ने उनके लिए मिशाल पेश की है जो बिना वजह संक्रमण काल व महामारी के दौरान सारे कोविड नियमो को ताक पर रखकर शादी विवाह के आयोजनों में भींड़ जुटाकर मुसीबतों को न्यौता दे रहे हैं।
दरअसल ढोढ़िया पारा निवासी भगवानदत्त के बेटे मोनू की शादी काफी पहले पड़ोसी गांव सहिबापुर निवासी स्व0 नाथूराम चौहान की बेटी रेशमी चौहान से तय थी। भगवानदत्त के करीबी अचलपुर गांव निवासी राजगीर बहादुर चौहान ने यह शादी तय कराई थी। शादी की तिथि 27 अप्रैल को मुकर्र थी। कोरोना काल में दोनों परिवारों को लगा कि शादी की तिथि बदलनी पड़ेगी। इस बीच राजगीर बहादुर चौहान ने पहल की तो धुन के पक्के भगवानदत्त ने तय किया कि शादी तय तिथि पर ही होगी। राजगीर बहादुर चौहान ने कहा कि शादी की रस्म वह वजीरगंज थाने के बगल मां दुर्गा मंदिर पर संपन्न कराएंगे। उनका यह व्रत मंगलवार शाम को पूरा हुआ। भगवानदत्त बतौर बाराती अपने बेटे मोनू के साथ मंगलवार शाम मां दुर्गा मंदिर पहुंच गये। यहां रेशमी अपनी मां कृष्णावती और भाई सुनील के साथ पहले ही पहुंच गई थी। राजगीर बहादुर चौहान ने मां दुर्गा मंदिर के पुजारी अजय कुमार को दोपहर मे ही बुला लिया था। यज्ञ कुंड के समक्ष पूजा से सजी थाल के साथ शाम को विधि-विधान से शादी की रस्म पूरी कराई गई। मोनू और रेशमी ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई और जनम-जनम के वंधन में वंध गये। इसके बाद राजगीर बहादुर ने सभी को मिठाई खिलाकर पानी पिलाया, और फिर दुल्हन की ससुराल के लिए विदाई हुई।

दहेज के नाम फूटी कौड़ी भी नही स्वीकारी

बिन बारातियों के संपन्न हुए इस शादी में जहां भींड़ न जुटाकर लोगों को दूल्हे दुल्हन ने महामारी के दौरान लोगो को अनावश्यक भींड़ न जुटाने का संदेश दिया तो वहीं शादी का सुखद पहलू यह भी रहा कि वर पक्ष ने एक रुपये भी दहेज के रुप में न लेकर दहेज प्रथा का भी विरोध किया व दहेज मुक्त शादी करने का भी संदेश दिया। लड़की पक्ष के लोगों ने कुछ देना भी चाहा तो यह कहकर मना कर दिया कि इस शादी में कुछ भी न लेने का उन्होंने मन बना लिया है।

रेशमी ने ली थी पुलिस से शादी करने की अनुमति

सहिबापुर निवासी स्व0 नाथूराम की बेटी रेशमी अपनी शादी पुलिस की निगरानी में करना चाहती थी। वह प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार तिवारी से मिली और आपबीती सुनाई। प्रभारी निरीक्षक संतोष तिवारी ने थाने के बगल मां दुर्गा मंदिर में शादी की अनुमति दे दी।
जिसके बाद मां दुर्गे व यज्ञ कुंड के समक्ष शादी की सारी रश्में विधि विधान से निभाई गयी।
कोरोना काल में हुई इस शादी की चर्चाएं क्षेत्र में चारों तरफ हैं।

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