Gonda News:94वें बलिदान दिवस पर याद किए गए अमर शहीद राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी

जेल परिसर में हवन व शंाति पाठ के बाद अमर शहीद को दी गई श्रद्धान्जलि

काकोरी काण्ड के आरोप में तय तारीख के दो दिन पहले  17 दिसंबर 1927 को गोण्डा जिला  कारागार में अंग्रेजी हुकूमत ने मात्र 26 की उम्र में  दे दी थी फांसी 

“मै मरने नही स्वतंत्र भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं”


कोरोना काल के चलते इस बार उनके परिवार के लोग नही पहुंच सके :जेल अधीक्षक शशि कांत सिंह 

राम नरायन जायसवाल

 गोण्डा।शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा’’ के संकल्प के साथ स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायक शहीद राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी जी के 94वें बलिदान दिवस के अवसर पर जिला कारागार में आर्य समाज द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ हवन-पूजन एवं शांति पाठ सम्पन्न कराया गया। लाहिड़ी जी के बलिदान दिवस पर अमर शहीद को बतौर मुख्य अतिथि जनपद के जिला जज, जिलाधिकारी व मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सहित अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों, गणमान्य नागरिकों, अधिवक्ताओं तथा समाजसेवियों द्वारा श्रृद्धासुमन अर्पित किए गए। जिला कारागार में हवन-पूजन करने के उपरान्त जिला जज, डीएम, सीजेएम, विधायक सदर बलरामपुर पल्टूराम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने जेल परिसर में लाहिड़ी जी के बलिदान स्थल पर स्थापित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनकी शहादत को याद किया।

काकोरी काण्ड में दोष सिद्धि के बाद फांसी के लिए  19 दिसंबर 1927 की तारीख तय की गयी थी। लेकिन इस महान क्रांतिकारी को जेल से जबरन छुड़ाकर ले जाने के लिए चन्द्रशेखर आजाद के गोण्डा में आकर कही छुप जाने की खुफिया सूचना पर अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें नियत तिथि से दो दिन पूर्व दिसम्बर को फांसी के फंदे पर लटका दिया था। 

अमर शहीद लाहिड़ी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के उपरान्त लाहिड़ी जी को सलामी दी गई और राष्ट्रगान की धुन बजाई गई। श्रद्धान्जलि सभा एवं सलामी के उपरान्त आयोजित समारोह में सर्वधर्म समभाव के तहत सभी धर्मों के धर्म गुरूओं द्वारा शांति किया गया।

 इस अवसर पर लाहिड़ी जी के जीवन एवं बलिदान पर प्रकाश डालते हुए जिला जज संजय शंकर पाण्डेय ने अमर शहीद लाहिड़ी जी के अन्तिम वाक्य ‘‘मैं मरने नहीं जा रहा, अपितु आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं’’ दोेहराते हुए कहा कि लाहिड़ी जी का जीवन राष्ट्र प्रेम का एक जीवन्त उदाहरण है। हम सबको उनसे प्रेरणा लेते हुए देश हित के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए, यही लाहिड़ी जी के लिए सच्ची श्रृद्धान्जलि होगी। 

जिलाधिकारी डा0 नितिन बंसल ने कहा कि लाहिड़ी जी जैसे व्यक्तित्व और सच्चे राष्ट्र भक्तों के बलिदानों के कारण ही हम सब भारतीय आज आजाद भारत में सांस ले पा रहे हैं। उन्होने लोगों का आहवान करते हुए कहा कि इस अवसर पर हम सबको निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र सेवा का संकल्प लेना चाहिए और आजादी के दीवानों के सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान करना चाहिए।

सीजेएम हरीराम ने कहा कि लाहिड़ी जी का बलिदान भारत के युवाओं के लिए सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश को गुलामी की दास्तां से मुक्ति दिलाने के लिए 26 वर्ष की उम्र में 17 दिसंबर 1927 अपने देश के लिए फांसी के फन्दे को हंसते हुए चूमने वाले अमर शहीद लाहिड़ी जी का सम्पूर्ण जीवन प्रेरणा से भरा हुआ है।

नगर मजिस्ट्रेट वन्दना त्रिवेदी ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में देश के विकास में युवाओं की भागीदारी होना आवश्यक है और इसकी प्रेरणा के लिए लाहिड़ी जी का जीवन दर्शन सबसे बड़ा उदाहरण है।

समारोह के बाद जिला जज, सीजेएम, डीएम तथा एएसपी द्वारा लाहिड़ी उद्यान परिसर में पौधरोपण भी किया गया। इसके उपरान्त सभी अधिकारियों ने फांसी स्थल को भी देेखा, जहां पर लाहिड़ी जी को फंासी दी गई थी।

बलिदानी के नाम पर नही हो सका स्टेशन का नाम 

गोण्डा कचेहरी स्टेशन का नाम लाहिड़ी स्टेशन घोषित करने की मांग आज तक पूरी न हो सकी हर बार शहीद के बलिदान दिवस पर उठती है मांग इस बार भी उठी तो जिला प्रशासन ने शासन में प्रस्ताव भेजने की बात कही है। 

 कार्यक्रम के दौरान  विधायक सदर बलरामपुर पल्टूराम, मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी, एएसपी महेन्द्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट वन्दना त्रिवेदी, जेल अधीक्षक शशिकान्त सिंह, एसडीएम सदर कुलदीप सिंह, सीओ लक्ष्मीकान्त गौतम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा0 इन्द्रजीत प्रजापति, डीजीसी क्रिमिनल बसन्त शुक्ला, बार एसोशिएसन अध्यक्ष दीनानाथ त्रिपाठी व पूर्व अध्यक्ष रविचन्द्र त्रिपाठी, शारदाकान्त पाण्डेय, रेखा श्रीवास्तव, समाज सेवी धरमवीर आर्य, माधवराज सिंह, परसपुर विकास मंच के अरूण सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक व अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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