Lakhimpur Kheri News:धान क्रय केन्द्रों पर हो रहा कृषकों का शोषण, आधी कीमत पर धान बेचने को मजबूर किसान

मण्डी समिति के क्रय केन्द्र पर जानवर खा रहे किसानों के मेहनत की उपज

एन.के.मिश्रा

लखीमपुर-खीरी। धान खरीद के नाम पर जनपद के छोटे एवं मंझोले काश्तकारों का शोषण थमने का नाम नहीं ले रहा है और इसे लेकर जिला प्रशासन पूर्णरूप से उदासीन है तथा बिचौलियों सहित खाद्यान्न माफियाओं सहित राईस मिलर्स के एजेन्ट मजबूर किसान का धान औने-पौने मूल्य पर खरीद कर टनों धान मण्डी की आढ़तों पर पहुंचाने मे पूर्व की तरह लगे हैं। केन्द्रों पर लगा थोड़ा बहुत धान पशुओं का चारा बनता जा रहा है। 

   मजबूरी में राईस मिलों एवं बिचौलियों को धान बेंचने वाले काश्तकारों का कहना है कि वे बुरी तरह से ठगे जा रहे हैं और उन्हे धान बोने की लागत निकाल पाना भी कठिन है। बन्नी के निकट एक राईस मिल पर धान बेचने आए काश्तकारों का तो यही कहना है कि सरकार व प्रशासन मे बैठे अधिकारी मात्र कागजों पर नीतियां बना कर उन्हे मूर्ख बनाने मे लगे हैं। यह पूंछने पर कि वह अपना धान खरीद केन्द्रों जिन्हे सरकार ने स्थापित किया है उन केन्द्रों पर अपना धान क्यों नही ले जा रहे है, उन केन्द्रों पर अपना धान क्यों नही ले जा रहे हैं? इस प्रश्न के उत्तर मे एक शिक्षित काश्तकार ने बताया कि हमें सरकार व अधिकारी मजबूर कर रहे हैं, यहां पर एक हजार रुपए प्रति कुंतल धान बेंचने के लिए। पेशे से अधिवक्ता ने कहा कि मैं अपना धान तीन बार सरकारी क्रय केन्द्र पर बेंचने गया, परन्तु तीनों बार मुझे यह कहकर वापस कर दिया गया कि उसके धान मे नमी है, तो कभी कहा गया कि उसका धान फरहा है तो कभी यह कहकर वापस कर दिया गया कि उसके धान मे धूल-मिट्टी मिली है।

उक्त कृषक ने राष्ट्रीय प्रस्तावना को बताया कि उसने सरकारी क्रय केन्द्र तक धान पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली के किराए मे पन्द्रह सौ रुपए खर्च किये, दस लीटर डीजल मे सैकड़ों रुपए बर्बाद किये, इस प्रकार उक्त अधिवक्ता कृषक को अपनी धान की उपज को सरकारी खरीद केन्द्र पर बेंचने मे पांच-छह हजार रुपए निरर्थक खर्च करने पड़े, साथ ही समय की बर्बादी अलग से हुई। उसने सुझाव देते हुए कहा कि जिस प्रकार बिचौलियों द्वारा किसान की उपज उसके खेत से ही खरीद ली जाती है, ऐसा ही यदि सरकार करे तो किसानों को शोषण से मुक्त किया जा सकता है, अन्यथा यह क्रम चलता ही रहेगा और देश का अन्नदाता कभी फंसी लगाकर तो कभी भूख से मरता ही रहेगा। 

   जनपद के सभी क्रय केन्द्रों पर कृषकों का शोषण जबरदस्त गति से हो रहा है और किसान अपने खून पसीने द्वारा उगायी कृषि उपज को खरीददारों के द्वारा तय की गई कीमत पर बेचने को मजबूर है और यही कारण है कि आज कृषक दीन-हीन बना अपना जीवन-यापन कर रहा है या समाप्त कर रहा है।     सरकार क्रय केन्द्रों पर कृषकों की उपज को खरीदते समय घटतौली भी की जाती है, उपज की तौल करने के लिए चाहें इलेक्ट्रानिक कांटे लगाए जायें, या तराजू कोई फर्क नही पड़ता है क्योंकि जनपद का बांट-माप विभाग कुम्भकर्णी नींद मे हमेशा सोता रहता है और जब जागता है तो कागजी लिखा-पढ़ी करके शासन एवं प्रशासन को भेज देता है। 

   बीते दिनों लखीमपुर मण्डी सचिव को लखनऊ से आए एक अधिकारी जो कभी लखीमपुर मे एस0डी0एम0 के पद पर तैनात रहे, ने यह आरोप लगाते हुए निलम्बित कर दिया कि उसने धान खरीद मे लापरवाही बरती, परन्तु उक्त लखनऊ से आए अधिकारी को मात्र लखीमपुर मण्डी मे ही धान खरीद मे लापरवाही बरतना नजर आया, शेष सभी मंडियां क्या दुरुस्त है? साथ ही प्रश्न यह भी उठता है कि क्या उक्त अधिकारी स्वयं मे सत्यनिष्ठ एवं ईमानदार रहे हैं या हैं? एस0डी0एम0 लखीमपुर के पद पर तैनाती के समय क्या उन्होने लखीमपुर राजस्व की संपत्ति जो बिक रही थी व अब भी बिक रही है, का संज्ञान लिया?

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