Lakhimpur Kheri News:फसल के भाव से किसान पस्त, बिचौलिये मस्त

एन.के.मिश्रा

सिंगाही, लखीमपुरखीरी।धान सहित अन्य फसलों के भाव निश्चित होने के  बाद भी किसान की फसल कम से कम दामों में ही ली जा रही है, और फायदा खाद्यान्न माफिया लूट रहे हैं।

इसका प्रमुख कारण सरकारें किसानों को अपना गुलाम बना कर रखती हैं। क्योंकि किसान को छोड़कर  देश का हर तबका अपने द्वारा तैयार किये गए उत्पाद का दाम खुद तय करताt है। कमोबेश सारे उत्पादक ही तय करते हैं कि उनके उत्पाद की कीमत क्या होगी लेकिन बेचारा किसान जो पैदा करता है, उसकी कीमत कोई और यानी सरकारें, समितिया आदि तय करती हैं। किसान की दुश्वारी यहीं नहीं खत्म होती।अपने उत्पाद को बेचने की तय कीमत भी उसे नही मिलती, क्योंकि उसके उत्पाद की कीमत के बीच उत्पाद माफिया आ जाते जो अधिकारियों के मिली भगत से पूरा लाभ कमाते,और किसान अपनी जरूरत को पूरी करने हेतु अपने उत्पाद को औने-पौने दामों में बेचने को विवश हो जाता।

अपर्याप्त सरकारी खरीद, दलालों के दलदल और भंडारण की किल्लत के कारण जिस दाम वह फसल बेंचता है उससे उसकी फसल की लागत भी नही निकल पाती जिससे किसान ऋणमुक्त की बजाय ऋणयुक्त होता चला जाता है। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का बीणा उठा रखा है, किन्तु देश के करीब 14 करोड़ कृषि परिवारों में 6 फीसदी किसान ही एमएसपी का लाभ उठा पाते हैं, बाकी 94 फीसदी बाजार और बिचौलियों पर ही निर्भर रहते हैं।

अन्य क्षेत्रों की तुलना में कृषि क्षेत्र आय असमानता को सबसे अधिक देख रहा है, इसलिए किसानों को एमएसपी का कानूनी अधिकार दिए जाने की जरूरत है, कोई किसान की फसल उससे कम दाम पर न खरीदें जो निश्चित है, अगर कोई खरीदता है तो उस पर कानूनी करवाई हो और सरकार या सम्बन्धित व्यक्ति उसकी क्षतिपूर्ति करें।

यह कितना विचारणीय विषय है कि जो किसान देश के 130 करोड़ आबादी का पेट भर रहा है, आज वह अपनी उपज का सही दाम भी हांसिल नही कर पा रहा है। किसान इन परिस्थितियों के चलते ही आत्महत्या करता है।

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