Gonda Mankapur News:कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर मेंं कृषकों ने धान गन्ना एवं दलहनी फसलों में उर्वरक प्रयोग की मात्रा का अध्ययन किया गया

बी.के.ओझा

मनकापुर ,गोंडा।आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर गोंडा द्वारा दिनांक 1 सितंबर 2020 से 6 सितंबर 2020 तक ग्राम धुसवाखास, लमटी उकरहवा तथा भरहू के कृषकों का धान गन्ना एवं दलहनी फसलों में उर्वरक प्रयोग की मात्रा का अध्ययन किया गया । इस अवसर पर वैज्ञानिकों की टीमें गठित कर विभिन्न गांवों का अध्ययन किया गया ।अध्ययन में पाया गया कि धान गन्ना एवं दलहनी फसलों में उर्वरकों का संतुलित प्रयोग नहीं किया जा रहा है । जिससे इन फसलों की अच्छी उपज प्राप्त नहीं हो रही है । इस अवसर पर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉक्टर ओम प्रकाश, डॉक्टर मिथिलेश कुमार पांडे, डॉक्टर पीके मिश्रा, डॉक्टर राम लखन सिंह डॉक्टर केके मौर्य, डॉ मनोज कुमार सिंह आदि ने किसानों से संपर्क कर जानकारी प्राप्त की । प्राप्त जानकारी को निर्धारित प्रपत्र में भरकर आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में भेजा गया । फसलों में उर्वरक की संतुलित मात्रा का प्रयोग बेहद जरूरी है । नाइट्रोजन फास्फोरस पोटाश जिंक सल्फेट गंधक का प्रयोग मृदा परीक्षण की संस्तुति के आधार पर करना चाहिए । जनपद में काफी भूमि ऊसर से प्रभावित है ।इन क्षेत्रों में फसलो एवं प्रजातियों का चयन एवं उसर में फसल उत्पादन तकनीक का प्रयोग कर अच्छी पैदावार ली जा सकती है । जनपद में धान गेहूं एवं गन्ना मुख्य फसलें हैं । इन फसलों की अच्छी पैदावार हेतु फसलवार उपयुक्त प्रजातियों का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग के कारण मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है । मृदा के स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए ढैचा की हरी खाद,गोबर की खाद, कंपोस्ट की खाद एवं केंचुए की खाद का प्रयोग बेहद जरूरी है।

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