Lakhimpur Kheri News:एक बार फिर गिनती से बाहर रह जाएंगे केन टाइगर

एन.के.मिश्रा
लखीमपुर-खीरी। दुधवा नेशनल पार्क के बाघों की गणना 20 दिसम्बर से शुरू हो रही है। गणना के लिए जंगल में कैमरे लगाए गए हैं। दुधवा के जंगलों के बाहर गन्ने के खेतों में कई बाघ रह रहे हैं। ये बाघ गिनती से बाहर रह सकते हैं।  जंगल के बाहर कई गांव ऐसे हैं जहां अक्सर बाघ दिखाई देते है। वन विभाग की टीमें बाघों को जंगल में खदेड़ने में लगी रहती हैं। दुधवा मे बाघों की गणना के लिए दुधवा नेशनल पार्क, कर्तनिया घाट इन जगहों पर कैमरे लगाने का काम शुरू हो गया है। बताया जाता है कि गणना करीब एक महीने तक चलेगी। कैमरे में आए फुटेज के आधार पर बाघों की गणना दुधवा प्रशासन करेगा। जिले के कई इलाके ऐसे हैं जहां महीनों से बाघों का बसेरा है। जंगल से बाहर इन गांवों के आसपास अक्सर बाघ दिखते हैं। बाघ गन्ने के खेतों को अपना बसेरा बना रहे हैं। अक्सर नीलगाय, पालतू गाय आदि का शिकार करते हैं। इससे गांव वालों में दहशत बनी रहती  है।  दुधवा पार्क के एफडी संजय पाठक का कहना है कि फिलहाल जंगल क्षेत्र के बाघों की ही गिनती की जाएगी।
जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों जैसे महेशपुर, भीखमपुर, तिकुनिया, महेवागंज, फूलबेहड़ के खेतों के पास बाघ देखे जाते हैं। इसके अलावा धौरहरा के रमियाबेहड़ इलाके में भी बाघ देखा गया था। अब जंगल से बाहर रह रहे यह बाघ गणना में कैसे शामिल होंगे यह बड़ा सवाल है।
-बाघ वैसे तो जंगलों में रहते हैं लेकिन इस समय खेतों में गन्ना लगा हुआ है। गन्ना के खेतों में बाघों को छिपने में कोई परेशानी नहीं होती है। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि बाघ गन्ना के खेतों को नरकुल समझकर जंगल से बाहर आ जाते हैं और गन्ना के खेतों से होते हुए जंगलों से दूर पहुंच जाते हैं। यहां उनको आसानी से भोजन मिल जाता है जिससे गन्ने के खेतों को बसेरा बना लेते हैं। उधर यह भी बताया जाता है कि जंगल में बाघों के बीच आपसी टकराव के कारण भी बाघ जंगल से बाहर निकल आते हैं और गन्ना के खेत महफूज ठिकाना बनते हैं।

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