Lakhimpur Kheri News:घाटे में गन्ना बेचने को विवश हैँ यूपी के किसान, सरकारी लागत से कम है प्रदेश का गन्ना मूल्य,मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

गन्ना उत्पादक संघ उ0 प्र0 ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

एन.के.मिश्रा

गोला गोकर्ण नाथ (लखीमपुर-खीरी)। गन्ना उत्पादक संघ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजकर प्रदेश के गन्ना किसानों द्वारा घाटे में गन्ना बेचने का दावा किया है और सरकारी संस्थान द्वारा गन्ने की आँकतित लागत ₹317 के आधार पर गन्ना मूल्य पुनः निर्धारित कर बढ़ाने की मांग की है।
ज्ञापन में लिखा गया है कि 10 नवंबर 2020 को संघ द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ,गन्ना एवं चीनी विकास मंत्री सुरेश राणा और गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी को ज्ञापन भेजकर उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर द्वारा इसे पेराई सत्र में गन्ने की आँकलित लागत के आधार पर किसानों का मुनाफा जोड़कर गन्ना मूल्य निर्धारित करने की मांग की थी। ज्ञापन के साथ परिषद द्वारा आँकलित लागत की प्रमाणित प्रति भी संलग्न की गई थी किंतु सरकारी लागत के आधार पर गन्ना मूल्य निर्धारित न कर पेराई सत्र 2017/18 से सत्र 2019/20 तक निर्धारित गन्ना मूल्य ही पुनः घोषित कर दिया गया है। जिससे प्रदेश के किसानों का घाटा हो उनकी कमर टूट रही है।
संघ के अध्यक्ष लोकेश कुमार गुप्त और महामंत्री हरिहर प्रकाश बाजपेई ने कहा है कि देश में उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब उत्तराखंड और हरियाणा में राज्य परामर्शी मूल्य निर्धारित होता है। इस पेराई सत्र में पंजाब सरकार ने उत्तर प्रदेश के बराबर अनुप्रयुक्त प्रजाति का मूल्य ₹310 सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹315 और शीघ्र प्रजाति का मूल्य ₹325 निर्धारित किया है। जबकि उत्तराखंड सरकार ने अनुप्रयुक्त प्रजाति का मूल्य ₹312 सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹317 और शीघ्र प्रजाति का मूल्य ₹327 घोषित किया है।हरियाणा सरकार ने इस पेराई सत्र में अनुप्रयुक्त प्रजाति का मूल्य ₹340 सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹345 और शीघ्र प्रजाति का मूल्य ₹350 निर्धारित किया है, जो पूरे देश में सर्वाधिक है।
पत्र में लिखा गया है कि प्रदेश की चीनी मिलें घाटा होने का रोना रोती रहती हैं जबकि वह मुनाफे में चल रही हैं। क्योंकि गुड़ इकाइयां चीनी मिलों की कीमत पर ही गन्ना खरीद कर लाभ अर्जित कर रही हैं। इस कारण चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति नहीं हो पा रहा है और मई में बंद होने वाली चीनी मिले गन्ने के अभाव मे मार्च में ही बंद होने जा रही हैं।

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