Lakhimpur Kheri News:प्रदेश सरकार 475 रुपए निर्धारित करें गन्ना मूल्य- लोकेश गुप्त

एन.के.मिश्रा
गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। गन्ना उत्पादक संघ उत्तर प्रदेश ने उ0 प्र0 गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर द्वारा आँकलित गन्ने की उत्पादन लागत 317 रुपए को दृष्टिगत रखकर 475 रुपए गन्ना मूल्य शीघ्र निर्धारित कर गन्ना भुगतान कराने की मांग की है।
संघ के अध्यक्ष लोकेश कुमार गुप्त और महासचिव हरिहर प्रकाश बाजपेई ने कहा है कि उन्होंने 10 नवंबर 2020 को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गन्ना एवं चीनी विकास मंत्री सुरेश राणा और गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी को मांग पत्र भेजकर लागत में 25 फ़ीसदी मुनाफा जोड़कर सामान्य गन्ने का मूल्य 394 रुपए और शीघ्र प्रजाति के गन्ने का मूल्य 404 रुपए निर्धारित करने की मांग की थी किंतु आधा गन्ना पेराई सत्र बीत जाने के बावजूद उ0 प्र0 सरकार गन्ना मूल्य अब तक निर्धारित नहीं कर सकी है। जिससे गन्ना किसानों में गन्ना मूल्य को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार के बजट सत्र में महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने अभिभाषण में एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय कृषि आयोग की सिफारिशों के अनुसार कृषि लागत में 50 फ़ीसदी लाभांश देने की बात कही थी। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर द्वारा वर्तमान पेराई सत्र के लिए गन्ने की उत्पादन लागत 317 रुपए आँकी गई है ।इसमें 50 फ़ीसदी मुनाफा जोड़कर गन्ने का मूल्य 475 रुपए होता है।
गन्ना उत्पादक संघ उत्तर प्रदेश ने लिखा है कि इस समय एक क्विंटल गन्ने से 12 फ़ीसदी से अधिक चीनी बन रही है चीनी मिलें न्यूनतम मूल्य 31 रूपये से बढ़ाकर 33 रुपए प्रति किलो के ऊपर भाव से चीनी बेच रही हैं। 12 किलो चीनी 396 रुपए की है। एक क्विंटल गन्ने में 5 किलो शीरा 25 रुपए का, 30 किलो बगास 60 रुपये का, 6 किलो प्रेस मड जैविक तीन रुपए का, 1 लीटर एथेनॉल 57. 61 रुपए का बिक्री होता है। इसके अलावा महंगी ब्राउन शुगर और सेनीटाइजर भी बनाया जा रहा है। प्रोसेसिंग चार्ज 40 रूपये है। यह सभी उत्पाद 500 रुपये से अधिक मूल्य के हैं। लाभ में होने के बावजूद प्रदेश की चीनी मिलें घाटा बताकर गन्ने का भाव कम करने के लिए सरकार पर दबाव डाल रही हैं। इसी कारण प्रदेश सरकार गन्ना मूल्य निर्धारित नहीं कर सकी है संघ ने तत्काल 475 रुपये गन्ना मूल्य निर्धारित कर गन्ना भुगतान न करने वाली चीनी मिलों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की मांग की है ।

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