Gonda News:गुटखा डीलरों पर महामारी एक्ट के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करे प्रशासन

प्रदीप कुमार शुक्ला
गोंडा : यूपी कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन जैसी विभीत्स परिस्थिति में जहां आम आदमी को आर्थिक संकटों से जूझना पड़ रहा है तो वहीं पूंजीपतियों के लिए ये संकट का समय भी सुनेहरा अवसर साबित हो रहा है।

सामान्य दिनों की महंगाई ने मजदूर अथवा माध्यम वर्गीय परिवारों के घर का बजट पहले ही बिगाड़ रखा था अब सप्ताह में दो दिनों का लॉक डाउन और भी मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

दाल तेल सब्जी जैसी अन्य खाद्य पदार्थों के अतिरिक्त अन्य वस्तुएं जैसे गुटखा और सिगरेट के बड़े डीलरों की चांदी है ।

लोग मरें तो मरें मुनाफा खोरों को इससे कोई फर्क नही पड़ता, और ना ही जिला प्रशासन काला बाजारी करने वालों पर किसी प्रकार सख्ती दिखा रहा है, बुरी आदतों के शिकार पान मसाला सिगरेट प्रेमियों के लिए सबसे महंगा दौर चल रहा है।

मजे की बात तो ये है की हर वर्ग के लोग कमला पसन्द सहित अन्य नामी गिरामी पान मसालों के शौक़ीन है लेकिन आज तक किसी ने भी अधिक दामों में बिक्री किये जाने का विरोध नही किया है, असल में कमला पसन्द के पाउच पर चार रूपये मूल्य छपा होने के बाद भी उसे पांच रूपये में बेचा जाता है बनारसी आशिक जिसे लोग आशिकी के नाम जानते खाते बचाते है उसकी कीमत 50 पैसे छपी होती है जो सामान्य दिनों में एक रूपये में बेचा जा रहा था और लोग शौक से इसे चबा कर मजे लेते थे, ये तो रही सामान्य दिनों की बात कोविड महामारी की वजह से चल रहे लॉक डाउन में पान मसाला सात से आठ रूपये तथा आशिकी डेढ़ से दो रूपये तक यानी दोगुने रेट में बेचा जा रहा है।

छोटे दूकानदारों की मजबूरी है की उन्हें पूंजीपतियों से महंगे दामों में खरीदना पड़ता है इसलिए उसे दोगुने दामों में बेचना लाजमी है।

ये लूट का खेल किसी एक स्थान पर नही बल्कि पूरे जनपद में क्या समूचे मण्डल में चल रहा है किन्तु सरकार के वो नुमाइंदे जो अन्य खाद्य सामाग्रियों की सैम्पलिंग करते हैं तेल खोया मिठाई दूध इत्यादि खनिज पदार्थों की जांच कर कार्यवाही करते है, शराब और बियर की ओवर रेटिंग पर कार्यवाही हो जाती है लेकिन आज तक इस बड़ी लूट पर कोई कार्यवाही नही देखने को मिली, जबकि उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा के लिए तमाम सरकारी अधिकारी तैनात हैं फिर भी अगर ऐसी लूट अनवरत चल रही है तो इसका सीधा संकेत ये है की जनता से हो रही लूट में सरकारी नुमाइंदे अथवा जिले व मण्डल के सभी बड़े नेता इसमे संलिप्त हैं, इसमे तनिक भी सन्देह की गुंजाइश हो तो मौत के सामान की काला बाजारी करने वालों पर महामारी एक्ट के तहत कार्यवाही अपेक्षित है।

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