Gonda News:मदरसे में फर्जी नियुक्त के मामले में तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सहित 13 पर मुकदमा दर्ज,जांच क्राइम ब्रांच को

पंं.श्याम तिवारी

गोण्डा।एक मदरसे में आधा दर्जन लोगों की जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से अध्यापक पद पर फर्जी तरीके से नियुक्ति कर दी गई। शासन स्तर पर शिकायत हुई तो जांच में कई अधिकारियों व कर्मचारियों की गर्दन फंसती दिखी। इस पर रसूख के बल पर जांच को दबवा दिया गया। इतना ही नहीं, इन शिक्षकों को करीब 3 करोड़ रूपये वेतन के भुगतान की भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई, मामला उच्च न्यायालय पहुंचने के बाद 13 लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना क्राइम ब्रांच को सौपी गयी है।

     जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के मोहल्ला मुट्ठीगंज निवासी करीम मोहम्मद खां पुत्र रहीम बक्श को मदरसा हनीफिया हिदायतुल उलूम होलापुर काजी में 1 जनवरी 1995 को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त किया गया था। इस मदरसा को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1 अप्रैल 1996 को अनुदान पर लिया गया तथा संस्था की तरफ से 15 कर्मचारियों, शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर की सूची रजिस्ट्रार अरबी-फारसी मदरसा को 4 मार्च 1997 को पत्र के माध्यम से प्रेषित की गई थी, जिसमें करीम मोहम्मद खां का नाम क्रमांक संख्या 13 पर उल्लिखित है, जबकि उक्त सूची में गुलाम मोहयुद्दीन, असरार अहमद, याद अली, मोहम्मद सईद, मोहम्मद अतीक एवं मोहम्मद शमीम का नाम उल्लिखित नहीं था। इनकी फर्जी तरीके से नियुक्ति की गई, जिसमें विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी अहम भूमिका निभाई। फर्जी नियुक्ति की शिकायत जरूरी दस्तावेजों के साथ जिलाधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के साथ ही शासन स्तर पर की गई। शासन से जब जांच शुरू हुई तो अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की अधिकारियों व कर्मचारियों की गर्दन फंसती नजर आई। इस पर अधिकारियों ने रसूख के बल पर जांच को दबवा दिया। हालांकि, निवर्तमान विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जांच में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी समेत कई लोग दोषी पाए गए, लेकिन प्रभाव का इस्तेमाल करके कार्रवाई को प्रभावित कर दिया गया। इन फर्जी शिक्षकों के वेतन के तौर पर 3 करोड़ रूपये का गबन करके सरकारी राजस्व को चूना लगाया गया। इस बाबत की गई शिकायतों पर तमाम जांचें हुईं लेकिन दोषी पाए जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया। अदालत के आदेश पर जिले के दो तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी समेत दर्जन भर लोगों के विरूद्ध नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।


इनके विरूद्ध दर्ज हुआ केस

जिले के तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रविकांत व अमीर उल्ला के अलावा गुलाम मोहयुद्दीन, असरार अहमद, याद अली, मोहम्मद सईद, मोहम्मद अतीक, खुर्शिद अहमद, मोहम्मद आदिल, लियाकत अली, अल्पसंख्यक कल्याण के कनिष्ठ लिपिक शमीम अहमद, प्रबंधक निलंबित मो. शरीफ खां तथा उक्त अवैध कार्य में सहयोग करने वाले अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध आईपीसी की धारा 409, 419, 420, 467, 468 व 471 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अपर पुलिस अधीक्षक महेन्द्र कुमार ने बताया है कि उच्च न्यायालय के आदेश पर मोहम्मद करीम खां के तहरीर पर तत्कालीन  अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सहित विद्यालय के छः शिक्षको सहित 13 लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है जिसकी जांच क्राइम ब्रांच को सौपी गयी है। 

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