Lakhimpur Kheri News:फसल का उचित दाम और गन्ने का भुगतान न मिलने से दर-दर की ढोकरें खाने को मजबूर किसान

एन.के.मिश्रा

सिंगाही,लखीमपुर खीरी। किसान शासन-प्रशासन की कठपुतली बनकर रह गया है। किसानों के लिए शासन द्वारा जारी की गई लाभकारी योजनायें केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं, जमीनी स्तर पर केवल किसान को सुनने तक ही मिलती है उसे उसका लाभ नही मिल पाता।

शासन द्वारा आदेश किया गया था कि गन्ना खरीद के 14 दिन बाद ही किसान का भुगतान हो जाना चाहिए, उसके उपरांत धान खरीद को लेकर शासन ने सख्त आदेश दिया था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) से कम दाम में किसान का धान खरीद रहे लोगों पर सख्त कार्यवाही होगी। लेकिन अभी तक जो भी हो रहा है वो आदेशों के विपरीत हो रहा है, क्योंकि किसान को न ही गन्ने का भुगतान समय से मिला बल्कि चीनी मिल का नया सत्र चालू होने को है, लेकिन उसे अभी तक पुराने सत्र का भुगतान नही मिल पाया है, ऐसा ही कुछ हाल धान खरीद का है धान खरीद में खाद्यान्न माफियाओं का ही बोल बाला है।

धान खरीद को लेकर शासन ने लागत से लगभग 50-83 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868 रुपये निश्चित किया था  लेकिन किसान को इतने कम दामों में धान बेंचना पड़ रहा कि उसकी लागत भी नही निकल पा रही है।क्षेत्र के किसान गन्ना भुगतान में चीनी मिलों के दगा का शिकार हुए ही साथ ही साथ धान की फसल पैदाकर पछता रहे हैं।किसानों का बकाया गन्ना भुगतान अब तक नही मिला जबकि नया सत्र चालू होने को है, उसके बाद धान की फसल भी कट चुकी है, लेकिन उसे सही भाव में लेने वाला कोई नही।पिछले साल के मुकाबले बाजार में धान का भाव बिल्कुल आधा है। इसके बाद भी धान को बेचने के लिए किसानों को दर-दर की ढोकरें खाना पड़ता है,क्योंकि क्रय केंद्रों से लेकर बाजार तक खाद्यान्न माफियाओं के ही बोल बाला रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *