Lakhimpur Kheri News:करोना काल में मानसिक सकून जरूरी, थोक व्यापारियों का निर्णय अमान्य : ट्रेडर्स एंड इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन

एन.के.मिश्रा

गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर खीरी। थोक व्यापारियों द्वारा दुकानों के खुलने और बंद होने के समय निर्धारण का विरोध करते हुए ट्रेडर्स एंड इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन करोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए लंबे समय तक के लिए फुटकर व पटरी दुकानदारों को ध्यान में रखते हुए व्यापारियों की दुकान खुलने का समय 12:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक की घोषणा की है।
एशोसिएशन अध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने कहा कि समाज ने 2020 के लॉकडाउन को देखा है सरकार ने किसी भी टैक्स में कोई छूट नहीं दी, पटरी व फुटकर दुकानदारों को दुकानों का किराया, बिजली का बिल, स्कूल की फीस, राशन आदि सारी व्यवस्थाओं को समस्त फुटकर व्यापारियों ने अपने आप ही पूरा किया है।
विगत 2019 से सरकार ने राशन कार्ड बनाने की वेबसाइट को भी ओपन नहीं किया। जिससे तमाम जरूरतमंद लोगों को सरकारी राशन से वंचित रहना पड़ा।
गोला नगर में कई व्यापार मंडल थोक व्यापारियों द्वारा बनाए गए हुए हैं ऐसे थोक व्यापारियों का व्यापार सुबह से दोपहर तक ही होता है। इसलिए उनके द्वारा सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में सोचा गया और उन्होंने पटरी, फुटकर, खूनचे के दुकानदारों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि जल्दबाजी में जब हर कोई प्रतिदिन बना रहेगा तो सरकारी काम जो कि आम जनमानस को छूट नहीं मिलेगी। वह किस समय निपटाये जाएंगे। इसलिए रजनीश गुप्ता नगर अध्यक्ष ट्रेडर्स एंड इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन फैसला लिया है कि करोना काल को दीर्घकालीन मान कर हर गतिविधि और तनाव को कम करने के लिए व्यापारियों के व्यापार की हर गतिविधि और तनाव को कम करने के लिए व्यापारियों के व्यापार का समय निर्धारण अपराहन 12:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक का सुनिश्चित रखा जाए।
ऐसा करने से हर किसी के सारे कार्य वैश्विक महामारी को खत्म करने वाले पूर्ण किए जाएंगे। करोना महामारी को देखते हुए वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हर एक मनुष्य को पूरी नींद लेना चाहिए। जब सुबह का समय व्यापारियों का 12:00 बजे का होगा तब इंसान सुबह आराम से उठेगा उसके बाद अगर उसका कोई सरकारी काम होगा तो वह सरकारी ऑफिस से 10:00 से 12:00 के बीच में निपटा लेगा। फिर वहां अपना व्यापार करेगा, ऐसा करने से गरीब छोटा व्यापारी भी अपना परिवार सकून से चला सकेगा। करोना काल में जिसको मानसिक सुकून नहीं है वह बीमारी से जल्द ग्रस्त हो रहा है इसलिए जो भी फैसले लिए जाएं समाज को सकून पहुंचाने वाले हो तभी वह मान्य हो सकते हैं।

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