Gonda Colonelganj News: कोरोना की काली क्षाया में नही हुआ झूला का मेला,सावन झूला मेला उपेक्षित रह गया

एसपी सिंह / ज्ञान प्रकाश मिश्रा

करनैलगंज(गोंडा)। कोरोना की काली क्षाया में नही हुआ झूला का मेला। उपेक्षा के बीच कोरोना ने सावन झूला मेला उपेक्षित रह गया। करनैलगंज के प्रसिद्ध सावन झूला मेले की कई वर्षों से हो रही उपेक्षा पर इस वर्ष कोरोना का कहर भारी पड़ा। इस वर्ष मंदिरों में महज भगवान की मूर्ति को झूले पर झुलाया गया।

किसी भी मंदिर में कोई कार्यक्रम का आयोजन नहीं हुआ। करनैलगंज नगर में मंदिरों की संख्या अधिक होने के कारण इसे मिनी अयोध्या कहा जाता है। यहां सोमवार की रात झूला मेले का अंतिम दिन था। झूला मेला कब आया और कब खत्म हो रहा है लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

कोरोना के कहर से भगवान भी अछूते नहीं रहे और सावन के अंतिम 5 दिनों में करनैलगंज के करीब 6 दर्जन मंदिरों में झूला मेले का आयोजन होता रहा है। जो इस वर्ष कोरोना का शिकार हो गया। मंदिरों में पुजारियों के द्वारा केवल भगवान को नए वस्त्र पहना कर उन्हें झूले पर झुलाया गया। न भजन कीर्तन हुए न ही नाच नौटंकी हुई और झूला मेला मंदिर के अंदर ही अंदर संपन्न हो गया।

यह झूला मेला रक्षाबंधन के दिन तक चलता है और सोमवार को इसका अंतिम दिन था। अधिकांश मंदिरों में मात्र पूजन आरती एवं भगवान की मूर्ति को झूले पर रखकर झूला झुला कर औपचारिकता को पूरा कर झूला मेला संपन्न हो गया। करनैलगंज में मंदिर के सरबराकार शिवकुमार पुरवार व अरुण वैश्य बताते हैं कि हर साल झूला मेला जब होता था तो मंदिर में कथा, प्रवचन, कीर्तन का आयोजन होता था। करीब दो दशक पूर्व इसी करनैलगंज में होने वाले झूला मेले को देखने के लिए प्रदेश के तमाम जिलों से श्रद्धालु आते थे। मगर लोगों की ऐसी नजर लगी कि करनैलगंज का झूला मेला अपना अस्तित्व ही खो बैठा और पिछले वर्ष तक जो भजन कीर्तन प्रसाद वितरण होता था, वह भी इस बार नहीं हो सका।

उन्होंने बताया कि केवल भगवान की मूर्ति को झूले पर झूला कर औपचारिकता पूरा किया गया। जबकि नगर क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के भी तमाम मंदिरों में पहाड़ापुर, गोनवा, चौरी चौराहा, दुबहा बाजार, गौरवा खुर्द गांव में जबरदस्त मेले का आयोजन होता था। वह भी इस वर्ष नहीं हुआ। करनैलगंज के प्रसिद्ध झूला मेले पर कोरोना ने पूरी तरह विराम लगा दिया।

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