Gonda News:गोण्डा के महिला अस्पताल मे डॉक्टरों की लापरवाही से गर्भ में ही हुई 02 बच्चों की मौत

राम नरायन जायसवाल

गोण्डा ।जिला के महिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर मरीजों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। इनकी लापरवाही की बात करें तो यहां पिछले दो दिनों के अंदर दो अलग अलग क्षेत्र की रहने वाली गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होने के पहले ही उनके कोख मे बच्चों की मौत हो गयी। इस तरह यहां आये दिन मरीजों की दुश्वारियां बढ़ रही है बावजूद इसके जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।

मामले को लेकर थाना कोतवाली नगर कटहा माफी घोसियाना निवासी एडवोकेट मो0 सफीक ने यहां के कारनामो का जो खुलासा किया है वो यकीनन हैरान कर देने वाला है। मो0 सफीक ने बताया कि दिनांक 22 सितंबर को जब उनकी गर्भवती पत्नी गुलनाज बानो की तबियत बिगड़ने लगी तो वह अपनी पत्नी को लेकर महिला अस्पताल के लेडी डाक्टर ललिता के पहुंचे जहां महिला डॉक्टर ने प्राइवेट अल्ट्रासाउंड करवाया जिसे देखने के बाद पता चला कि गर्भ मे पल रहे बच्चे की थैली फट गई है। इतना कुछ जानने के बाद भी डॉक्टर ने उसे एडमिट न करके कुछ दवाईयां देकर ये कहा कि इन्हें घर ले जाओ थैली फटने के बावजूद बच्चा स्वस्थ है। ये दवाईयां देकर 3 दिन बाद 25 सितंबर को इन्हें लेकर आना डिलीवरी करवा देंगे।  मरता क्या न करता सफीक अपने पत्नी को लेकर घर पहुंचा जहां रात मे गुलनाज बानो की तबियत और बिगड़ने लगी, आनन फानन मे वह दूसरे दिन फिर अस्पताल पहुंचे .जहां दोबारा अल्ट्रासाउंड करवाया गया जिसकी रिपोर्ट ने सभी को हिला दिया।

बताते चलें कि गर्भ की थैली का पानी सूखने से बच्चा मर चुका था, जिसे सुनकर सफीक के परिजनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। उन्होंने डॉक्टर को जब ये कहा कि आपकी लापरवाही से गर्भ मे पल रहे बेटे की जान गई है। तो वो परिजनो से ही झड़प करने लगी। और कहां इन्हें अलग ले जाओ यहाँ सुविधा नही है। पीड़ित ने यह भी कहा कि उससे सुविधा शुल्क की भी डिमांड की गई। आखिरकार पत्नी को लेकर सफीक जब प्राइवेट अस्पताल पहुंचा तब जाकर डाक्टरों द्वारा मृतक बच्चे को बाहर निकालकर पत्नी को बचाया जा सका। प्रकरण को लेकर पीड़ित पति व उनके संवंधियों द्वारा जब अधीक्षक डॉ0 अनंत कुमार मिश्रा से डॉक्टर को ससपेंड करने की मांग की गई तो उन्होंने पहले शिकायती पत्र देने के लिए कहा है। अब यहां सवाल तो यह उठता है कि जब डॉक्टर ललिता को पता था कि गर्भ में थैली फट चुकी है तो उन्होंने मरीज को एडमिट क्यों नही किया और अगर मामला सीरियस था तो समय रहते ही जवाब क्यों नही दिया।

वहीं मौत का दूसरा मामला देहात कोतवाली निवासी गढ़वा घाट धनी पट्टी से जुड़ा है जहां की रहने वाली  अर्चना पाण्डेय पति लक्ष्मी कांत पाण्डेय डिलीवरी के लिए महिला अस्पताल में भर्ती थी। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण जन्म से पहले ही बच्चा गर्भ में ही मौत के आगोश मे समा गया। जिसे लेकर अस्पताल पहुंचकर परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया..पीड़ित परिजनों का आरोप है कि उन्हें वहां एक महिला दलाल मिली..जिसने अर्चना पांडेय के परिजनों को नार्मल डिलीवरी करवा देने की बात कही जिस पर परिजनों ने 3000 रुपए देने की बात कही,इसी बीच मरीज की तबियत काफी बिगड़ गयी तत्त्पश्चात अल्ट्रासाउंड कराने पर पता चला कि कोख में बच्चा मरा हुआ है बावजूद इसके वहां मोबाइल चला रही महिला डॉ0 ने अर्चना पांडे के सास को डिलीवरी रूम में नहीं जाने दिया गया.. इसी बीच मरीज की हालत गंभीर होने लगी परिजनों ने लेबर रूम में जाकर मरे हुए बच्चे को पैदा कराया और तत्काल उसे बाहर लाकर हंगामा शुरू कर दिया.. जिला महिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनन्त प्रकाश मिश्रा ने मीडिया को बताया कि मरीज कल भर्ती हुआ था डॉक्टर और नर्स ड्यूटी बदलती रहती है महिला दलाल महिला पुलिस के साथ बुलाकर परिजन के सामने  पूछ जांच की गई दलाल महिला को नगर कोतवाली भेज दिया गया है।

वहीं आरोपी महिला दलाल आशा तिवारी का कहना है कि वह नगर कोतवाली क्षेत्र गंगापुर की रहने वाली है। पीड़ित परिजन उसके रिश्तेदार हैं। जबकि परिजनों का कहना है कि उसे वह नही जानते, बहरहाल मामले को लेकर पीड़ित परिजन ने डॉक्टर नर्स और दलाल पर तीन हजार लेने का आरोप लगाते हुए कार्यवाही करवाने की बात कही है। इस तरह यहां तैनात धरती के भगवान हैवान बनते जा रहे हैं और जिम्मेदार तमाशबीन बने बैठे हैं।

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