Lakhimpur- Kheri-News:कुटीर उद्योग का रुप ले रहा चिप्पड़ , युवा पीढ़ी हो रही बर्बाद,चिप्पड़, गांजे की एक विशेष किस्म जो नेपाल, मणिपुर, नागालैंड और आसाम में मिलता है

धौरहरा सर्किल में बढ़ा व्यापार , जिम्मेदारों की कमाई का बना जरिया 

एन.के.मिश्रा

धौरहरा (लखीमपुर खीरी)।धौरहरा क्षेत्र में नशे की पुड़िया ( चिप्पड़ ) का व्यापार जोरों पर है । चिप्पड़ व्यापारी मोटी कमाई के चक्कर में युवा पीढ़ी को गर्त में ढकेल रहे है । स्थानीय पुलिस छोटभैया नेताओं के दबाव में जानकर भी इन नशा व्यापारियों पर नकेल नहीं लगा पा रही है । पड़ोसी देश नेपाल से चिप्पड़ लाकर व्यापारी कस्बा , गांवों सहित छोटी-छोटी दुकानों पर बेंच रहे हैं । बताया जाता है कि चिप्पड़ से होने वाली आय में क्षेत्रीय पुलिस की भी हिस्सेदारी होती है । जिससे चिप्पड़ व्यापारी बेखौफ हो अपना व्यापार चलाते हैं । धौरहरा थाना क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांव , धौरहरा कस्बा सहित कई छोटे बड़े चौराहे नशे का हब बन गए यहां धड़ल्ले से नशा व्यापारी चिप्पड़ बेंच कर युवा पीढ़ी का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं । पुलिस की अभिरक्षा में हो रहा चिप्पड़ का ये व्यापार दिन दूनी , रात चौगुनी तरक्की कर रहा है । थाना क्षेत्र के धौरहरा कस्बे , सिसैया चौराहा , भौवापुर , सरसवा , हरदी गुलरिया , कफारा , खमरिया , कटौली , ईशानगर आदि स्थान चिप्पड़ व्यापार के बड़े बाजार है । जहां सुबह से शाम तक दुकानें सजी रहती है । स्थित यह है कि यह नशा व्यापारी मासूम बालकों को भी चिप्पड़ बेंचने में संकोच नहीं कर रहे हैं । जिसके परिणामस्वरूप युवा पीढ़ी नशे में आकर भविष्य बर्बाद करने के साथ ही अपराधों की तरफ बढ़ रही है । अपराध कम करने का दावा करने वाली क्षेत्रीय पुलिस इन चिप्पड़ व्यापारियों पर लगाम लगाने के बजाय मूकदर्शक बनी हुई है।

क्या होता है चिप्पड़ —
चिप्पड़, गांजे की एक विशेष किस्म होती है, जो नेपाल, मणिपुर, नागालैंड और आसाम में पाई जाती है। गांजे की इस विशेष किस्म की कलियों को तोड़कर दबाकर छांव में सुखाया जाता है जिससे वह परतदार होकर कड़ी हो जाती है। इस कड़ेपन के कारण ही लोग इसे चिप्पड़ के नाम से पुकारते हैं। चिप्पड़ को सिगरेट, चिलम और हुक्के में रखकर पिया जाता है। इसका नशा काफी तेज होता है। इसके पीने वालों को आदत बन जाती है जिसे छुड़ाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है।

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