Lakhimpur Kheri News: आवागमन प्रतिबंधित पर नेपाल सीमा पर हो रही जमकर तस्करी

एसएसबी व सुरक्षा एजेंसियों को नहीं लगती भनक-तस्कर अलर्ट

एन.के.मिश्रा
पलिया कला, लखीमपुर खीरी। कोविड-19 व चीन से तल्खी के बाद भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया, लेकिन सीमा के रास्ते तस्करी के खेल पर प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है। तस्करी पर रोकथाम के लिए एसएसबी के साथ यहां कई सुरक्षा एजेंसियां भी तैनात हैं। इसके बाद भी आए दिन तस्करी के माल की बरामदगी से इसका खुलासा हो रहा है। बनगवां, सूड़ा, चंदनचौकी स्थित एसएसबी कैंप के पास से  एसएसबी जवानों की तैनाती है वहीं कुछ दूरी पर एसएसबी जवान तैनात भी रहते हैं। इसके बावजूद तस्कर आंख में धूल झोंकने में कामयाब रहते  हों जाते हैं। जिस तरह से तस्कर साइकिल व मोटरसाइकिलों पर लादकर करोड़ों रुपये का माल सीमा पार कर देते हैं, उससे अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगती है। एसएसबी व पुलिस के जवान सीमा पर तस्करी का माल भी बरामद करते हैं, बावजूद इसके तस्करी पर अंकुश क्यो नही लग पा रहा है एक नजर।
*इन सामानों की होती है तस्करी*
-भारत से बकरा, प्याज, कपड़ा, मोटर पा‌र्ट्स, स्मैक, ब्राउन शुगर व नशे की दवाओं की तस्करी होती है।
*नेपाल से इन सामानों की होती है तस्करी*
 नेपाल से चाइनीज कास्मेटिक सामान, विदेशी सुपारी, पाकिस्तानी छुहारा, काली मिर्च, चाइनीज जैकेट, नेपाली चरस, नेपाली शराब, गुटखा, सिगरेट आदि की तस्करी की जाती है।
जबकि सीमावर्ती थानों व बार्डर के सुरक्षा में  तैनात जवानों व सभी पुलिसकर्मियों को सर्तक किया गया है। लेकिन उसके बावजूद भी तस्करी पर अंकुश लगाने में सभी टीमें विफल साबित हो रही हैं कई बार ऐसा भी होता है कि तस्करी की सूचना एसएसबी के आला अधिकारियों को दी जाती है लेकिन बॉर्डर पर बैठे तस्कर को सूचना पहले ही  मिल जाती है जिससे वह तस्कर माल को इधर-उधर गांवों में छुपा देते है और जैसे ही बॉर्डर खाली देखा माल को नेपाल पहुंचा दिया जाता है। इससे बॉर्डर के खुफिया तंत्र भी काफी कमजोर होते चले जा रहे हैं जिसका कारण बॉर्डर पर बैठे तस्कर जो विभागों पर नजरें गड़ाए बैठे रहते हैं वही विभागों के मुखबिर अपने आप में महफूज नहीं हैं विभागों के ही कुछ लोगों ने बताया की बॉर्डर पर अगर किसी विभागों को भी जानकारी दी जाती है तो संबंधित विभागों के लोग टच करो टच सारी जानकारी पहुंचा देते हैं। जिससे विभाग के सूत्र पर खतरा मंडराने लगता है अब देखना है कि विभाग इस पर ध्यान देते हुए संबंधित विभागों पर क्या कार्रवाई करता है जिससे तस्करों का  बढता हुआ मनोबल गिर सके।

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