Gonda Mankapur News:नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर बाल सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा उनके चित्र पर पुष्प वर्षा कर किया माल्यार्पण

बी.के.ओझा

मनकापुर ,गोंडा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर बाल सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कार्यक्रम बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर पर आयोजित कर नेता जी को याद किया गया। इस अवसर पर नेताजी को माल्यार्पण किया गया, तथा उनके चित्र पर पुष्प वर्षा की गई बाल सामाजिक कार्यकर्ता पूजा मनमोहिनी ने कहा जब हमारे देश में अंग्रेजों द्वारा हमारे लोगों पर जुल्म ढाए जा रहे थे। हमारे हिंदुस्तानी भाई अंग्रेजों की गोलियों के शिकार हो रहे थे, चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था, हमारा देश गुलाम था, अंग्रेजों के कोड़े हमारे देश के लोगों पर बरसाए जा रहे थे, उस समय देश की ऐसी हालत देखकर बंगाल टाइगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश को आजाद कराने की ठानी, आजाद हिंद फौज बनाकर अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए, और उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया, ऐसे महान सपूत को सारा देश श्रद्धा से याद करता है। शिवा प्रदर्शनी ने कहा नेताजी सुभाष चंद्र बोस देश की आजादी के लिए सदैव प्रतिबद्ध थे, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजो के खिलाफ लड़ने के लिए नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया, अंग्रेजी हुकूमत को चकमा देकर जर्मनी पहुंचे और आजादी के लिए ताकत जुटाने का प्रयास किया। उन्होंने जय हिंद को अपना राष्ट्रीय नारा बना दिया, उनका व्यक्तित्व जीवन को अर्थपूर्ण बनाने के लिए हमें प्रेरित करता है। भारत में मौजूद करीब तीन लाख अंग्रेज लगभग 33 करोड़ भारतीयों पर शासन करते थे, ब्रिटिश सैन्य अधिकारी क्लाउडजान आयर, औचिनलेक से जब ब्रिटिश हुकूमत ने पूछा कि अगर वर्ष 1942 जैसी स्थित भारत में 1946- 1947 में दोबारा हुई तो क्या हम काम चला पाएंगे, इस पर उनका जवाब था आजाद हिंद फौज की वजह से अब भारतीय फौजी अंग्रेजो के खिलाफ हो चुके हैं, उन्होंने कहा फिर भारत पर राज करने का मतलब नहीं है। यह कथन आजाद हिंद फौज की अहमियत रेखांकित करता है। दिव्या दिव्य दर्शनी ने कहा नेताजी की फौज में बंगाली कम थे, अधिकतर लोग पंजाब या दक्षिण भारत से थे, दक्षिण भारत में सुभाष खासी लोकप्रिय थे, आज हमारा देश जहां पर खड़ा है उसकी नीव सुभाष चंद्र बोस ने रखी थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जब अपना भाषण देते थे, तो वहां मौजूद सभी लोग उनके कायल हो जाते थे, उनके साथ होते थे, ऐसा उनके भाषण में दम था, आजाद हिंद फौज ने भारत से लेकर सिंगापुर तक की यात्रा की और अपने देश को आजाद कराने के लिए सारे इंतजाम किए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दोनों में भले विवाद रहता था, किंतु दोनों का मंजिल एक था, नेता जी ने सर्वप्रथम महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कह कर संबोधित किया था। उनके विचार गांधीजी से अलग रहे, लेकिन लक्ष्य एक दिखा। बाल सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा नेता जी की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनायी गई। तथा देश से नेताजी के पद चिन्हों पर चलने की बात कही गई, इस अवसर पर अन्य बच्चों ने भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर गीत व विचार रखे। दर्जनों कार्यकर्ता इस अवसर पर जय हिंद का नारा लगाते नजर आए।

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