Lakhimpur- kheri-news-पक्षियों को दाना डाले बिना भोजन नही करते पंडित शिवाधार

एन.के.मिश्रा

गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर-खीरी।गोला तहसील मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर कपरहा गांव स्थित है। यह गांव पंडित अवध बिहारी शुक्ला स्वतंत्रता संग्राम की जन्म स्थली के रूप में जाना जाता है।     बताते चलें कि पंडित अवध बिहारी     शुक्ला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बड़े ज्येष्ठ पुत्र पं0 शिवाधार शुक्ला जो कि शुरुआती दौर में गोला के सोसाइटी में बड़े बाबू के पद पर रहकर लोगों की सेवा की तत्पश्चात ग्राम कपरहा के प्रधान के पद पर रहकर लोगों की निरंतर सेवा करते रहे ,लेकिन उनमें यह खास बात है कि वह प्रकृति प्रेमी के रूप में आज तक जाने जाते हैं और पक्षियों से काफी लगाव रखते हैं, जहां  एक ओर आए दिन भारत में बढते प्रदूषण के चलते पशु-पक्षी अपना दम तोड़ रहे हैं तो वही पं0 शिवाधार शुक्ल के दरवाजे पर प्रत्येक सुबह होते ही पक्षी चाहचाने लगते हैं, वह जैसे ही सुबह अपना दरवाजा खोलते हैं तभी पक्षी उनको घेर लेते थहैं और वह एक डलिया में अनाज के टुकड़े व रोटी के टुकड़े डालते हैं और जब तक एक-एक पक्षी का पेट नहीं भर जाता तब तक पक्षी उनको छोड़ने का नाम नहीं लेते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि शिवाधार का पक्षी प्रेम गजब का है।उनके बताए अनुसार इंदिरा गांधी के द्वारा जेल भरो आंदोलन के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास रहने के पश्चात एवं मुलायम सिंह यादव के आवाहन पर जेल भरो आंदोलन में भी उनको लोकतंत्र सेनानी का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है, उन्होंने अखबार वेब पोर्टल, व्हाट्सएप के जरिए राज्य सरकार से आग्रह किया है कि उनको लोकतंत्र सेनानी का दर्जा प्रदान किया जाए, जिससे वह अपनी बची खुची  जिंदगी लोगों की सेवा में अर्पण कर सके। 

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