Lakhimpur- kheri-news-पोषण माह के रूप में मनेगा सितम्बर अति कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन पर रहेगा जोर किचन गार्डन बनाने को लेकर किया जाएगा प्रोत्साहित

एन.के.मिश्रा

लखीमपुर खीरी। बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के स्वास्थ्य  में सुधार लाने के  उद्देश्य से वर्ष 2018 से सितम्बर को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप   में मनाया जाता है।  इस सम्बन्ध में राज्य पोषण मिशन के महानिदेशक एस.राधा चौहान ने सभी सम्बंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर इस माह आयोजित होने वाली गतिविधियों के बारे में जरूरी निर्देश दिए हैं ।

 –उन्होंने पत्र के जरिये कहा है कि इस माह में मुख्य दो गतिविधियों – अति कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन व अनुश्रवण तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों, विद्यालयों, शासकीय परिसरों एवं समुदाय में वृक्षारोपण का अभियान  चलाकर किचन गार्डन बनाने को प्रोत्साहित किया जाये । पत्र में कहा गया है –पांच वर्ष से  कम उम्र के बच्चों में बीमारी और मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण कुपोषण है । अति कुपोषित बच्चों की जल्दी से जल्दी पहचान कर उनका संदर्भन कुपोषण से होने वाले खतरे को कम करता है ।

किचन गार्डन में ऐसे पौधों को लगाने के लिए समुदाय को प्रोत्साहित किया  जाए जो कि  पौष्टिकता से भरपूरहों।  फल एवं सब्जियां सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं और अच्छे स्वास्थ्य  के लिए इन्हें अपने आहार में नियमित रूप से शामिल करना चाहिए । उदाहरण के लिए नियमित आयरन युक्त आहार  के सेवन से एनीमिया के स्तर में कमी आती है। हरी साग सब्जियों, खट्टे फलों, अदरक  , हल्दी आदि के सेवन से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इसलिए हमें ऐसे पौधों के रोपने को प्रोत्साहन देना है। यह माह साग- सब्जियों और फलों के पौधों को रोपने का सही समय है। इसलिए “पोषण के लिए पौधे अभियान” , किचन गार्डन को विकसित करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।    इसके अलावा बेस्ट प्रैक्टिसेज, जन्म के प्रथम 1000 दिन और कुपोषण के स्तर में कमी लाना मुख्य उद्देश्य है।

कोविड-19 के कारण पोषण माह डिजिटल तरीके से मनाया जायेगा। इस क्रम में  शिक्षा विभाग के माध्यम से पोषण विषय पर ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित कर जन्म के प्रथम 1000 दिन का महत्व, पोषण युक्त खाना , एनीमिया डायरिया एवं सफाई के विषय पर बल दिया जाये।इसके साथ ही पोषण माह के दौरान डिजिटल पोषण पंचायत आयोजित कर स्थानीय स्तर पर पोषण सम्बन्धी समस्याओं की पहचान कर उनका प्रबंधन एवं समाधान किया जा सके। पोषण से सम्बंधित विभागों के मध्य सहयोगी संस्थाओं के सदस्यों को शामिल करते हुए पोषण के विभिन्न विषयों पर वेबिनार  का आयोजन किया जाना चाहिए।

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