Lakhimpur Kheri News:प्रियंका गांधी पसगवां कांड की पीड़ित ब्लाक प्रमुख महिला प्रत्याशी व प्रस्तावक से मिली

एन.के.मिश्रा

मैगलगंज (लखीमपुर खीरी)। हाईप्रोफाइल हो चुके पसगवां कांड की हकीकत से रूबरू होने कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव व उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका वाड्रा सपा की महिला ब्लाक प्रमुख प्रत्याशी व प्रस्तावक से मिलने मैगलगंज के सेमराघाट गांव पहुंचीं। जहां उन्होंने लगभग बीस मिनट तक दोनों पीड़ित महिलाओं से घटना की जानकारी लेते हुए उनके साथ खड़े होकर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। इस दौरान सपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष क्रान्तिकुमार सिंह भी मौजूद रहे।

पसगवां ब्लाक के प्रमुख पद के नामांकन के दौरान सपा की तरफ से ब्लॉक प्रमुख पद का पर्चा दाखिल करते समय भाजपा समर्थित समर्थकों द्वारा महिला प्रत्याशी रीतू सिंह व प्रस्तावक अनिता यादव के साथ बदसलूकी व बवाल करते हुए कपड़े साड़ी आदि फाड़ दिए गए थे। इसके अलावा पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में ही महिला प्रत्याशी के साथ हांथापाई करते हुए उनका नामांकन पत्र भी छीनकर फाड़ दिया गया था। इस बवाल के वीडियो वायरल होने के बाद मामला हाईप्रोफाइल हो गया। प्रदेश के उच्चाधिकारियों की फटकार के बाद जिला प्रशासन ने ब्लाक परिसर के अंदर ड्यूटी पर तैनात सीओ मोहम्मदी समेत दो इंस्पेक्टर व अन्य पुलिस कर्मियों को निलम्बित कर दिया था।

लेकिन लखनऊ दौरे पर आईं कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव व उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका वाड्रा ने इस मामले की पीड़ित महिलाओं से मिलने का कार्यक्रम बना दिया। और शनिवार दोपहर 11:20 बजे वह अपने काफिले के साथ प्रोटोकॉल के तहत मैगलगंज क्षेत्र के सेमराघाट गांव आ पहुंची। जहां उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष लल्लू सिंह के साथ सपा नेता क्रान्तिकुमार सिंह के आवास पर मौजूद पीड़ित सपा प्रत्याशी रीतू सिंह व प्रस्तावक अनिता यादव से लगभग बीस मिनट बातचीत करते हुए घटना की पूरी जानकारी ली। इस दौरान प्रियंका को सपा नेता क्रान्तिकुमार सिंह ने घटनास्थल के वीडियो क्लिप भी दिखाए जिसमे महिलाओं के साथ अभद्रता, कपड़े फाड़ने व साड़ी खींचने की पूरी घटना है। महिलाओं से मिलने के बाद प्रियंका वाड्रा मीडिया से रूबरू हुईं। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने व उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के दावे करती है लेकिन इस घटना में तो महिलाओं के अधिकार का हनन किया गया। यह कैसा लोकतंत्र है। महिलाओं को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए उनके साथ अभद्रता कर कपड़े फाड़े गए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे उनके सामने एक महिला पर अत्याचार होता रहा और वह चुप रहे। कार्यवाही के नाम पर जिस सीओ ने महिला को बचाने का प्रयास किया उसे ही निलम्बित कर दिया गया। अन्य लोगों पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई? इतना बड़ा बवाल होने के बाद चुनाव रद्द क्यों नहीं किया गया? क्या महिलाओं को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है? क्या दस बारह गुंडे मारपीट कर चुनाव जीत लेंगे? सारे साक्ष्य वीडियो क्लिप मौजूद होने के बावजूद आखिर सरकार कोई ठोस कार्यवाही क्यों नहीं कर रही।

प्रियंका वाड्रा ने सत्तारूढ़ पार्टी व उनके नेताओं का नाम लिए बिना मांग करते हुए कहा कि उनकी मांग है जिन लोगों ने गुंडों को भेजा उन्हें पूरी जानकारी है कि उनकी सरकार में कैसे गुंडई की जा रही है यह चुनाव प्रक्रिया नहीं है इसलिए यहां दोबारा चुनाव होना चाहिए।

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