Lakhimpur- Kheri-News:कृषक कल्याण हेतु सीडीओ के सख्त निर्देश

एन.के.मिश्रा

लखीमपुर खीरी।  जनपद में कृषक सशक्तिकरण परियोजना का कृषक उत्पादक आर्गेनाइजेशन के माध्यम से बेहतर क्रियान्वयन हेतु मुख्य विकास अधिकारी प्राथमिकता पर कार्य किया जा रहा है।

कृषक सशक्तिकरण परियोजना को तीव्र गति प्रदान करने के लिये मुख्य विकास अधिकारी, लखीमपुर-खीरी द्वारा जनपद से जिला प्रशिक्षण अधिकारी डा0 राज किशोर के नेतृत्व में बीडीओ लखीमपुर सन्तोष कुमार सिंह,बीडीओ पलिया डा0 विनय कुमार सिंह, सहायक खण्ड विकास अधिकारी-लखीमपुर व नकहा, ग्राम विकास अधिकारियों, ग्राम रोजगार सेवक, एफ0पी0ओ0 के सदस्यों, प्रगतिशील किसानों, मीडिया कर्मियों का दल फील्ड इक्सपोजर विजिट हेतु निदेशक, एफ0पी0ओ0 कमलेश सिंह के ग्राम दसरथपुर, विकासखण्ड- मिश्रिख, सीतापुर को दिनाॅंकः 01 अक्टूबर, 2020 को भेजा। जहाॅ पर उक्त दल को कमलेश सिंह ने अपने क्षेत्र (विकासखण्ड- मिश्रिख व पिसावाॅं) के लगभग 70 एकड़ में टिसू कल्चर के माध्यम् से रोपित कराये गये हाईब्रिड बाॅंस का अवलोकन कराया। उक्त बाॅंस ऊसर भूमि से लेकर अच्छी भूमि पर रोपित है। भ्रमण दल उक्त का अवलोकन कर बहुत उत्साहित हुआ।

इसी प्रकार उसी क्षेत्र में कम पानी वाली बलुई भूमि में लेमनग्रास का कई किसानों के खेतों का अवलोकन कराया। पिसावाॅं ब्लाक के ग्राम-भिठौरा में लेमनग्रास के किसानों से परिचर्चा हुई, जिसमें लेमनग्रास उत्पादक किसानों के द्वारा अवगत कराया गया कि 02 बार की सामान्य टंकी में लेमनग्रास की पेराई से एक एकड़ में लगभग 80 लीटर तेल प्राप्त हुआ है, जिसका बाजार में मूल्य रू. 1200-1400/ प्रति लीटर है। भ्रमण दल वहाॅं सीमैप से लाई गयी लेमनग्रास की पौध का अवलोकन किया तथा इसकी खेती, पेराई तथा विपणन की बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की। उल्लेखनीय है कि लेमनग्राम, पामारोजा, खस बहुवर्षीय घासें है, जो एक बार रोपित करने पर 5 वर्षों तक फसल देती रहती है। इसकी फसल में तेल होने के कारण जानवरों द्वारा किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुॅंचाया जाता है, साथ ही पानी व पोषक तत्वों की बहुत ह कम आवश्यकता होती है।

इनसे 3-3 महीने के अन्तराल पर लगभग रू. 1.5-2.0 लाख प्रति एकड़ वार्षिक आय हो जाती है, जिससे किसानों की अन्य कार्यों हेतु नकदी की आवश्यकता पूरी हो सकती है। इनकी खेती के लिये लगभग रू. 40 हजार प्रति एकड़ की लागत में से रू. 30 हजार की आर्थिक सहायता 5 एकड़ तक के किसानों को ’कृषक सशक्तीकरण परियोजना के अन्तर्गत मनरेगा से उपलब्ध करायी जाती है। इसी प्रकार हाइब्रिड बाॅंस की बृद्धि तेजी से होती है तथा एक बार लगाने पर लगभग 40 वर्षों तक चलता है। 

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