Lakhimpur- Kheri-News:काम तो मिल गया,अब हुनर कहां से लाएं

– परिषदीय विद्यालयों में ड्रेस आपूर्ति में घपले

– सिलाई का काम मिला स्वयं सहायता समूहों को,आपूर्ति कर रहे हैं टेलर

एन.के.मिश्रा

धौरहरा ,लखीमपुर-खीरी।ईसानगर ब्लॉक के परिषदीय विद्यालयों में ड्रेस आपूर्ति के मद में बड़े घपले की सुगबुगाहट है।

महिला स्वयं सहायता समूहों को ब्लॉक के स्कूलों में ड्रेस सिलाई का काम राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत दिया गया है। अधिकांश समूहों के पास न तो संसाधन हैं औऱ न ही सिलाई में दक्ष टेलर। ऐसे में इलाकाई टेलर निःशुल्क ड्रेस वितरण में जुड़ गए। नकहा के एक टेलर ने ईसानगर ब्लॉक के तकरीबन सभी स्कूलों पर कब्जा कर लिया। जो समूहों को प्रति ड्रेस 30 रुपए भुगतान कर उनके बिल बाउचर लगाने की बात कहता है।ईसानगर ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में दो करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से करीब 36,000 बच्चों को ड्रेस उपलब्ध करानी है।

ब्लॉक में सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूहों को सिलाई के लिए स्कूल एलॉट कर दिए गए। टेलर और संसाधन न होने की वजह से समूहों ने इलाकाई दर्जियों से करार कर लिया। जिसके तहत ड्रेस तैयार करने का काम पेशेवर टेलर करेंगे। समूहों को 30 रुपए प्रति ड्रेस कमीशन देकर उनसे विद्यालय प्रबंध समिति के नाम बिल बाउचर लेंगे।खमरिया के एक निजी स्कूल में ड्रेस सिलाई केंद्र बनाया गया था। जिसे सिर्फ कागजों पर ही सीमित रखा गया। केंद्र पर एक भी दिन काम नहीं हुआ। जबकि यहां के समूह को जो विद्यालय मिले थे। वहां ड्रेस की आपूर्ति हो गई। ऐसे में व्यवस्था पर प्रश्न खड़े हुए तो समूह चलवाने वाले जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ते हुए  इस मामले में अपनी कोई भूमिका स्वीकार नहीं कर रहे है। जबकि स्वयं सहायता समूह स्थानीय स्तर पर ब्लॉक के अधीन हैं। ईसानगर के महरिया स्थित निजी स्कूल में संचालित एक सिलाई केंद्र पर कुछ सिलाई मशीनें रखी हैं। जानकारी करने पर पता चला कि पेशेवर टेलर पैसे लेकर चंद पीस कपड़ा काट कर केंद्र पर पहुँचा देते हैं। जिसे समूह की चंद महिलाएं ड्रेस सिलती दिखाई देती हैं। जिम्मेदार अफसरों की संदिग्ध भूमिका से न सिर्फ राष्ट्रीय आजीविका मिशन को घुन लगाया। बल्कि यूनीफॉर्म की गुणवत्ता भी प्रभावित हो गई। स्कूलों के प्रधानाध्यापक भी असमंजस में पड़े हुए है। एक अध्यापक ने बताया कि इसी तरह चलता रहा तो इस मनमानी के चलते बच्चों की ड्रेस की गुणवत्ता जहां बेहद खराब मिलेगी वहीं बच्चों को समय से ड्रेस मिलना भी टेढ़ी खीर साबित होगा।

*ड्रेस सिलाने के लिए दर-दर भटक रहे शिक्षक,ढूंढे नहीं मिल रहे समूह संचालक*


ईसानगर ब्लॉक में वैसे तो दर्जनों महिलाओं के समूह चल रहे है पर बच्चों की ड्रेस सिलने की बात जब शासन से आई तो ज़िम्मेदारों ने 36000 बच्चों की ड्रेस सिलने के लिए चुनिंदा केवल सात समूहों को नामित कर दे तो दिया पर लौटकर यह भी नहीं देखा कि समूह संचालित हो रहे है या नहीं। इनकी पोल तो उस समय खुल गई जब लाखुन न्याय पंचायत के शिक्षक बच्चों की ड्रेस की नाप करवाने व कपड़ा देने के लिए चयनित केंद्र खमरिया के चंद्रप्रभा सरस्वती शिशु मंदिर इण्टर कालेज में पहुचें जहां न तो उनको केंद्र पर कोई समूह ही मिला और न ही कोई चयनित संचालक। जिससे मायूस होकर शिक्षक बैरंग हो गए। वहीं कुछ शिक्षको ने इस सम्बंध में जब पता किया गया तो सब कागजों पर ही चलने की बात सामने आई।इस बाबत खंड शिक्षा अधिकारी शिवमंगल वर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैने अपने ब्लॉक के समस्त शिक्षकों को निर्देश दे दिए है कि चयनित सेंटरों पर जाकर समूह संचालकों से संपर्क कर बच्चों की नाप करवाने के बाद कपड़ा उपलब्ध करवाकर समय से ड्रेस वितरित करें। अगर शिक्षकों को इसमें कोई दिक्कत आ रही है तो उच्च अधिकारियों से बात कर इसका हल निकाला जाएगा।

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