Lakhimpur Kheri News:सफेद हाथी साबित हो रहा गन्ना किसान महाविद्यालय

एन.के.मिश्रा

मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी। विकास पुरूष के नाम से जाने जाने वाले यहां से पांच बार विधायक रहे बंशीधर राज के द्वारा गन्ना समिति की स्थापना के बाद 1998 में उच्च शिक्षा की ज्वाला जलाने के लिये गन्ना विकास समिति के माध्यम से मोहम्मदी में महाविद्यालय की नीव रखकर धन की व्यवस्था क्षेत्र के गन्ना किसानो के माध्यम से की। फलस्वरूप 2001 में गन्ना किसान महाविद्यालय बनकर तैयार हुआ। आज ये महाविद्यालय सफेद हाथी साबित हो रहा है।

छत्रपति शाहू की महाराज विद्यालय से सम्बध इस महाविद्यालय में कई विषयो के साथ-साथ अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता की नियुक्ति ही नहीं है। अध्यापको की कमी एवं प्रबन्धन की लूट खसोट के कारण कालेज में निरन्तर छात्र संख्या कम होती जा रही है। कालेज के पास 72 बीघा कृषि भूमि एवं प्रति वर्ष गन्ना किसानो से लाखो रूपयो की कटौती कर धन जमा होने के उपरान्त भी ये महाविद्यालय गम्भीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

मौजूदा समय में कालेज की जो जर्जर स्थिति है अगर जिला प्रशासन एवं सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया तो वो दिन दूर नहीं जब इस कालेज में ताले पड़ जाए। कालेज प्रबनन के द्वारा विद्यार्थियो के भविष्य के साथ किये जा रहे खिलावाड़ को देखकर भी जिम्मेदार आंखे मूंदे है। क्षेत्र के विद्यार्थियो को उच्च शिक्षा के लिये दूर शहरो को न भागना पड़े। इसके लिये मोहम्मदी के विधायक रहे बंशीधर राज ने पहले गन्ना समिति की नीव रखी और वर्ष 1997-98 में डिग्री कालेज स्थापित करने के पूरे प्रबन्ध कर लिये।

जन सहयोग से भूमि की भी व्यवस्था हो गयी और 2001 में मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र का पहला डिग्री कालेज अस्तित्व में आ गया। कालेज मे विज्ञान विषय छोड़कर सभी विषयो की पढ़ाई भी शुरू हो गयी क्षेत्र के छात्रो एवं अभिभावको में खुशी की लहर दौड़ गयी थी। शुरूआत के वर्षो में कालेज का प्रबन्धन एवं शिक्षक सभी ने उत्साह दिखाया और पठन-पाठन अच्छी तरह संचालित होता रहा। इकलौता होने के कारण जिन विषयो के अध्यापक नहीं भी थे तो छात्र किसी प्रकार काम चला रहे थे लेकिन धीरे-धीरे कालेज को प्रबन्धन दीमक की तरह चाटने लगे और मोहम्मदी में निजी क्षेत्र के उच्च स्तरीय मानको के साथ कई डिग्री कालेजो की स्थापना हो गयी तो यहां छात्रो की संख्या कम होती गयी।

भी न कालेज प्रबन्धन चेता और न कालेज प्रशासन। काफी समय से इस कालेज मे अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय के प्रवक्ता की भी नियुक्ति नहीं की गयी। जब कि कालेज मे पढ़ने वाले छात्र अंग्रेजी प्रवक्ता की नियुक् िकी मांग करते रहे कि जब अंग्रेजी की पढ़ाई नहीं होगी तो परीक्षा कैसे देंगे। छात्र अपने भविष्य को लेकर खासे परेशान थे प्रिन्सपल से रोज मांग की जाने लगी लेकिन वो इस समस्या की गेंद प्रबन्ध के पाले में फेंक कर अपने को बचाते रहे तथा आर्थिक संकट का भी हवाला देते रहे। प्रबन्धन एक ओर जहां छात्र-छात्राओ के भविष्य के साथ खेल रहा वही मुख्यमंत्री एवं सरकार के आदेशो की भी धज्जिया उड़ाता रहा। आज तक प्रिन्सपल या प्रबन्धन सेनेटाईजेशन नहीं कराया कोविड-19 के लिये बने सरकार के सारे नियम इस कालेज में कोई माने नही रखते इस गन्ना किसान महाविद्यालय में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा0 दिनेश शर्मा की सारी घोषणाओ एवं दावो की धज्जिया उड़ाई जा रही है।

कालेज के छात्र अंग्रेजी प्रवक्ता की नियुक्ति के लिये कई बार मांग भी कर चुके है लिखित में भी मांग कर चुके है। छात्रो का मांग पत्र इस समय के प्रबन्धक व गन्ना समिति के सचिव की टेबल पर लावारिस स्थिति में पड़ा है। कालेज प्रबन्धन का कहना है कि कालेज गम्भीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। गन्ना समिति के सचिव एवं एक पुराने लिपिक बलराम वरुण का कहना है की पिछले बीसियों वर्षों से कॉलेज फंड के लिए गन्ना किसानों से कोई कटौती नही की जा रही है जब उनसे ये पूछा गया कि वर्ष 2001 में कॉलेज शुरू हुआ  तो कटौती कब बंद हुई क्या कॉलेज बनने से पहले इस प्रश्न पर वो चुप्पी साध गए ।और कहने लगे अभी लेख तलाश कर सही तिथी बाता दी जाएगी गन्ना कमिश्नर ने किसानो से किसी भी प्रकार की कटौती पर प्रतिबंध लगा रखा था इसी कारण किसानो से कटौती नही की जा रही।

जबकि छात्रो से फीस हर वर्ष दसियो लाख रूपया गन्ना किसानो से उनके बेचे गए गन्ने के भुगतान में से सीधे मिल द्वारा ही कटौती कर कालेज के खाते में भेजा जाता है साथ ही बेहतरीन 72 बीघा कृषि योग्य भूमि जिससे इस समय कम से कम तीन हजार रूपये प्रतिबीघा ठेके का मिलता होगा यानि जमीन से भी दो लाख रूपये प्रति वर्ष प्राप्त हो रहा होगा। गन्ना   किसानो व भूमि से प्रति वर्ष बीसियो लाख रूपये की प्राप्ती के उपरान्त भी कालेज आर्थिक संकट से क्यो जूझ रहा ? कालेज का विकास एवं उत्थान क्यो वांधित है ?

आवश्यक विषयो के प्रवक्ताओ की नियुक्ति क्यो नहीं हुई और की गयी ? ये ऐसे प्रश्न है जो जांच का विषय तो है ही साथ ही ये साबित होता है कि कालेज की जो आया जिसे मौका मिला उसने लूटने का काम किया। छात्रो की मांग है कि कालेज का प्रबन्धन जिलाधिकारी अपने हाथो में ले ले तथा वित्तिय स्थिति की उच्च स्तरीय जांच करायी जाये तथा छात्रो के भविष्य के साथ खेलने वालो  पर कार्यवाही और अंग्रेजी सहित अन्य विषय के प्रवक्ताओ की नियुक्ति हो। देखना है कि छात्रो की इस मांग को सरकार और जिलाधिकारी कितनी गम्भीरता से लेते है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *