Gonda News:कटरा बाजार में शिक्षा की हालत बदतर,कई स्कूलों में लगे ताले विभागीय अधिकारी बने अनजान

रिपोर्ट-मणि कान्त तिवारी

ग़ोण्डा ।कटरा बाजार शिक्षा क्षेत्र मेंं कोरोना काल मे शिक्षा विभाग की हकीकत कुछ और ही है।अधिकारियों की मिलीभगत के चलते यहां के आंकड़े चौकाने वाले हैं कागजो में तो शिक्षक अपने समय से विद्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं और सरकार का लाखो रुपये डकार रहे हैं लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद हकीकत विपरीत मिली।कई विद्यालय तो ऐसे मिले जहां पर शिक्षकों की उपस्थिति चौकाने वाली रही और कुछ विद्यालय तो भगवान के भरोसे चल रहे थे वहां पर विद्यालयों में ताले लटक रहे थे।


शिक्षा क्षेत्र कटरा बाजार के अन्तर्गत करीब डेढ़ सौ से अधिक प्राथमिक विद्यालय है सूत्रो की माने तो करीब एक चौथाई विद्यालय के शिक्षकों के लिए कोरोना काल वरदान साबित हुआ है।
एक चौथाई विद्यालय के शिक्षकों की व्यवस्था बड़े अधिकारियों के हवाले है।क्षेत्र के नौनिहालो के भविष्य की चिंता शायद इन शिक्षकों को नही उनको बस अपना वेतन व अपनी मौज मस्ती की ही फिकर है।ऐसे मे देश के नौनिहालो का भविष्य कैसे उज्जवल होगा ?
मामला कटरा शिक्षा क्षेत्र का है जहां कागजो मे अधिकांश विद्यालय खुल रहे लेकिन धरातल पर उनकी हकीकत गुरुवार को देखा गया तो आकड़ा चौकाने वला मिला।

केस-1.गुरुवार को 11.48 बजे प्राथमिक विद्यालय परसौना द्वितीय में शिक्षा की हकीकत जानने के लिए पहुंचा जो पूर्ण रूप से बन्द मिला बाहर से देखने पर ऐसा लगा कि मिशन कायाकल्प के तहत कराया गया कार्य सिर्फ कागजो में है।

केस-2.समय 12.03 मिनट स्थान प्राथमिक विद्यालय गौरिया जहां पर चार शिक्षकों की तैनाती है जिसमे एक सहायक अध्यापक व एक शिक्षामित्र उपस्थित रहे सहायक अध्यापक ने बताया कि अन्य लोग अवकाश पर हैं।

केस-3.प्राथमिक विद्यालय चौदहा यहां पर पांच शिक्षकों की तैनाती है जिसमे प्रधानाध्यापक ही उपस्थित मिले।प्रधानाध्यापक ने बताया कि तैनात सभी लोग कई दिनो से अवकाश पर है।

केस-4.प्राथमिक विद्यालय मांझा में पहुंचने पर मिला कि दो शिक्षक तैनात है जिनकी उपस्थिति मौके पर मिली।

केस-5.प्राथमिक विद्यालय पिपरी मांझा में पहुंचने पर हकीकत पूरी तरह से चौंकाने वाला मिला यहां तो विद्यालय पूरी तरह से बन्द मिला।आस पास के लोगो ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब कोई आयोजन होता है तो ही इस विद्यालय का ताला खुलता है बाकी दिनो मे यहा कमरे मे पशुओं को बांधा जाता है।

अब सवाल यह है कि कोरोना काल मे जहां देश संकट के दौर से गुजर रहा है ऐसे मे शिक्षक के लिए कोरोना काल वरदान साबित होता दिख रहा है सरकार का करोडो रूपये पानी की तरह बहता दिख रहा है और मास्टर साहब घर पर बैठकर संकट की घड़ी का पूरा लाभ ले रहे है।

जिम्मेदार के बोल-
खण्ड शिक्षा अधिकारी अनिल झा से दूरभाष पर बताया की वह क्षेत्र में है वर्ष का अंतिम दिन लोग इसी लिए छुट्टियां बचा कर रखते हैं अधिकतर शिक्षक छुट्टी पर है।आपके माध्यम से यह जानकारी मिली है जांच की जाएगी उसके बाद आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

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