Lakhimpur- Kheri-News-बच्चों को दी जाएगी विटामिन-ए की खुराक, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में है सहायक

एन.के.मिश्रा

लखीमपुर  खीरी। बाल स्वास्थ्य पोषण माह (बीएसपीएम) का आयोजन हर साल जून और दिसम्बर में किया जाता है । कोरोना के संक्रमण की स्थिति को देखते हुए  इस बार अभियान का आयोजन संभव नहीं है लेकिन इस दौरान नौ  माह से पांच  वर्ष तक की आयु के बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन – ए की खुराक जरूर दी जाएगी, क्योंकि यह उनके लिए अत्यंत आवश्यक है ।

इसलिए ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) और शहरी स्वास्थ्य पोषण दिवस के माध्यम से विटामिन – ए की खुराक बच्चों को 10  अगस्त से पांच  सितम्बर तक एक सुनिश्चित योजना के अनुसार दी जायेगी ।

इस सम्बन्ध में परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं|जिला प्रतिरक्षण अधिकारी(डीआईओ) डा. बलवीर सिंह ने बताया –  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 10 अगस्त को लखनऊ से इस अभियान का औपचारिक  शुभारम्भ करेंगे ।

वीएचएनडी बुधवार को आयोजित होता  है लेकिन बुधवार को जन्माष्टमी की छुट्टी होने के कारण जिले में यह गुरूवार यानि 13 अगस्त को शुरू होगा । इस बार करीब 5.07 लाख  बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य  है।

  विभाग के पास  विटामिन- ए दवा की समुचित मात्रा उपलब्ध है। आशा कार्यकर्ता एक सुनिश्चित कार्य योजना बनाकर बच्चों की ड्यूलिस्ट तैयार करेंगी । डीआईओ ने बताया – विटामिन “ए” वसा में घुलनशील  है ।

कोरोना से बचाव में रोग प्रतिरोधक क्षमता महत्वपूर्ण है । नौ  माह से पांच  वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की नौ  खुराक दिये जाने का प्रावधान है । 9 से 12 माह के बच्चों को 1 मिली (एक लाख अंतर्राष्ट्रीय  यूनिट) मीजल्स एवं रूबेला के पहले टीकाकरण    के दौरान , 16  से 24 माह के बच्चों को 2 मिली (दो लाख अंतर्राष्ट्रीय  यूनिट) मीजल्स एवं रूबेला के दूसरे  टीके के साथ नियमित  टीकाकरण सत्र के दौरान, 2 साल से 5 साल के बच्चों को 2 मिली (दो लाख अंतर्राष्ट्रीय  यूनिट) 6-6 माह के अन्तराल पर बाल स्वास्थ्य पोषण माह के दौरान दी जाती है।

डा.बलवीर सिंह   ने बताया –  विटामिन ए की कमी से बच्चों में अंधापन हो जाता है जिसे रोका जा सकता है। विटामिन ए की कमी से गंभीर रोग तथा मृत्यु  भी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं में विटामिन ए की कमी से रतौंधी (नाईट ब्लाइंडनेस) हो जाता है जो कि मातृ मृत्यु के खतरे को बढ़ाता है।

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