Lakhimpur Kheri News:महामारी के दौर में सबसे उपेक्षित वित्तविहीन शिक्षक

संदीप शुक्ला

गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर-खीरी)। कोरोना महामारी में विगत एक वर्ष से वित्तविहीन शिक्षक बेरोजगार होकर भुखमरी की कगार पर हैं। सरकार ने अभी तक पता नहीं क्यों वित्तविहीन शिक्षकों के लिए कोई राहत भरी कार्य योजना नहीं बनाई है। आर्थिक झंझावात से गुजर रहे वित्तविहीन शिक्षकों के आगे जीविकोपार्जन का कोई विकल्प नहीं है। अब वह अपने आप को समाज का सबसे गया गुजरा व्यक्ति मानने लगे है, उन्हें अब कोई मार्ग नहीं सूझ रहा है सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। जबकि पटरी दुकानदारों, रेहड़ी, मोची, धोबी आदि सभी के लिए कुछ न कुछ व्यवस्था की है। जबकि सच्चाई ये है की आज के दौर में सबसे दयनीय स्थिति वित्तविहीन शिक्षकों की है। जिसके लिए सरकार ने एक शब्द तक नहीं कहा न ही उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में कोई चर्चा हो रही है। इस कठिन दौर में वे अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करेंगे, ये वह लोग हैं जो कोई अन्य काम भी अब नहीं कर सकते। अभी कुछ पता नहीं की स्कूल कब खुलेंगे और खुलेंगे भी तो क्या मानक रहेगा। सरकार ने यह आदेश कर दिया कि इस बार शुल्क नही बढ़ाया जाएगा, किन्तु इन शिक्षकों के बारे में कुछ भी नहीं सोंचा है। कुल मिलाकर अब सरकार व वित्तविहीन संगठन के पदाधिकारियों को इनके बारे में सोचना चाहिए। इन्हें कोई मानदेय मिलेगा ये संभव नहीं।

वित्तविहीन शिक्षकों से ग्राम्य वार्ता संवाददाता ने जब बात की तो उनका दर्द छलका और वह हर तरीके से अपने आपको असहाय बताते नजर आए।सभी वित्तविहीन शिक्षक जो भुखमरी की कगार पर हैं। वह आशा भरी निगाह से सरकार की ओर देख रहे हैं। कई बार सुनने में आया कि हम कोरोना पैकेज ही दे देंगे। 1 वर्ष बचा है अभी भी कुछ करके भुखमरी की कगार पर पहुंचे शिक्षकों के परिवारों को बचाया जा सकता है वरना समय सब को ठीक कर देता है।
राम नरेश मिश्र
प्रधानाचार्य

लोककल्याणकारी राज्य का यह कर्त्तव्य है और उत्तरदायित्व भी कि वह अपने समस्त नागरिकों के प्रति भोजन, वस्त्र, औषधि, सुरक्षा उपलब्ध कराए। वित्तविहीन शिक्षक के साथ न संस्था न्याय करती है और न ही सरकार। बल्कि कभी-कभी लगता है कि भाग्य और ईश्वर भी उसे सौतेलेपन से देखते हैं!
अतः माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि शिक्षकों को आर्थिक सहयोग देकर उनके साथ भी न्याय करें।
विमलेश कुमार मिश्र
प्रांतीय अध्यक्ष- आदर्श शिक्षक कल्याण समिति

, उत्तर प्रदेश आज कोरोना संक्रमण के कारण देश आर्थिक तंगी से गुजर रहा है इस अंतर्राष्ट्रीय आपदा के समय केन्द्र एवं राज्य सरकार रेहड़ी, खोमचे वालों के भविष्य की चिन्ता कर रही है जो कि अभिनन्दनीय है। परन्तु राष्ट्र को उन्नत पथ पर ले जाने के लिए भावी पीढ़ी को गढ़ने में लगे हुए वित्त विहीन शिक्षक व उनके परिवार किस विभीषिका से गुजर रहे हैं। कभी उनके बारे में भी आत्म चिन्तन करने की आवश्यकता महसूस की जाय। पूर्व में मिलने वाली राशि को बढ़ाने की बात करने वाले वर्तमान उपमुख्य मंत्री दिनेश शर्मा जी ने सरकार बनते ही उसे भी समाप्त कर दिया। उमेश द्विवेदी जी ने भी कई बार बात उठाई परन्तु नतीजा ढाक के तीन पात … सिर्फ आश्वासन ही मिला?
सरकार से निवेदन है कि वित्तविहीन शिक्षकों के परिवारों की पोषण की चिन्ता करते हुए कोई राहत निर्गत करने की कृपा करें।
सचिन शर्मा
प्रधानाचार्य

प्राइवेट शिक्षकों के लिए सरकार को कोई न कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। खासकर वित्तविहीन शिक्षक चाहें वह प्राथमिक का हो या उच्च प्राथमिक का हो को सरकार तत्काल मानदेय दे। जिससे कि वह विगत 15 महीनों से जो मुसीबत झेल रहे हैं। कम से कम उसमें कुछ सरकार उनका सहारा बने जिससे कि वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें।

विनीत सिंह भदोरिया
प्रांतीय कोषाध्यक्ष आदर्श शिक्षक कल्याण समिति ,उत्तर प्रदेश

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