Gonda Dhanepur News: पत्रकार को धमकी दिए जाने के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना शुरू

पत्रकार को धमकी दिए जाने के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना शुरू

 

प्रदीप कुमार शुक्ला 

धानेपुर,गोंडा।विवेचक अवधेश कुमार यादव ने पत्रकार से किया अपराधी जैसा ब्यवहार ।

थाना क्षेत्र के सतनामी पुरवा बाबागंज रहने वाले साजसाज अवधेश कुमार द्वारा पत्रकार को धमकी दिए जाने तथा धमकी को असल रूप दे कर झूठे मामले में फ़ंसायें जाने के मामले में धानेपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी है।

जिसकी विवेचना कर रहे एस.आई अवधेश कुमार यादव प्रारम्भिक जांच के लिए गुरूवार को पूछ ताछ करने के सिलसिले में पत्रकार के घर गए थे जहां पर विवेचक ने प्रदीप शुक्ला से घृणित ब्यवहार करते हुए रौबीले अंदाज में दूर रह कर बात करने को कहा, उसके बाद उन्होंने प्रकरण की जानकारी ली, जिसमे प्रदीप द्वारा द्वारा बताया गया की 25 सितम्बर को दीपू ने घर आ कर धमकी दी 26 को प्रदीप की तबियत अत्यधिक खराब होने की वजह से उन्हें इलाज के लिए पहले सतीश चन्द्र मेमिरिया हॉस्पिटल ले जाया गया जहां फिजिशियन एम. के पाण्डेय ने उन्हें तत्काल दो यूनिट खून चढ़वाने की सलाह दी, तथा अपनी तरफ से ट्रीटमेंट दिया।

इतना बताने पर विवेचक अवधेश कुमार यादव ने कहा की जब आपको 25 को ही धमकी मिली तो आपने पुलिस कम्प्लेंट क्यों नही किया ? जबकि बताया जा चुका था का 25 सितम्बर से प्रदीप की हालत नाजुक थी, इसलिए उन्हें 26 को हॉस्पिटल ले जाया गया था जहाँ डॉक्टर ने उन्हें तत्काल खून चढ़वाने को कहा था।

यही नही उन्होंने प्रदीप के पिता राम मनोहर शुक्ल जिनकी उम्र तकरीबन 65 वर्ष है उन्हें बुला कर पूछताछ किया गया आप सभी को अवगत करा दे की प्रदीप के पिता जो की 65 वर्षीय बुगुर्ग अस्थमा के मरीज हैं, उन्होंने कभी किसी पुलिस वाले से बात नही की है, उनके खिलाफ न्यायालत में कोई मुकदमा विचाराधीन नही है और ना ही उनके नाम थाने में कोई मामला दर्ज है, बृद्ध होने साथ उन्हें दिखने व सुनने की शक्ति कम है इसलिए वे हड़बड़ाहट में जो सही होता है वो भी नही बोल पाते, हालांकि विवेचक के द्वारा पूछे गए सवालों का जबाव उन्होंने जैसे तैसे दे दिया है किन्तु उनके इस तरह के ब्यवहार से झुब्ध हो कर प्रदीप ने विवेचना अधिकारी बदलने की मांग की है।

प्रदीप शुक्ला का मानना है विवेचक विपक्षी से सांठ गाठ करके मामले में मामले को नया रूप दे सकते हैं, इसलिए उनके स्थान पर मामले की विवेचना किसी और से कराई जाय।

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