Lakhimpur Kheri News:बच्चों को करें प्रतिदिन योगाभ्यास के लिए प्रेरित

एन.के.मिश्रा

लखीमपुर खीरी।योग स्वास्थ्य संवर्धन की एक वैज्ञानिक और सरल प्रक्रिया है। आज के समय में बड़ों के साथ साथ बच्चों के लिए योगाभ्यास भी बहुत ही जरूरी है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को योगाभ्यास करने के लिए प्रेरित करें। प्रतिदिन के योगाभ्यास से बच्चे न केवल शारीरिक, मानसिक बल्कि सामाजिक रूप से भी मजबूत होते हैं। ये बात योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ० रामेश्वर माहेश्वरी जी ने हास्य के योग की कक्षा में कहीं।

बताते चलते हैं कि हाइम योग द्वारा विगत 20 मई से बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन हेतु 12 दिवसीय नि:शुल्क योग कक्षाओं का संचालन प्रारंभ हुआ था।
आज दसवें दिन बच्चों को हास्य योग का अभ्यास डॉ० रामेश्वर महेश्वरी द्वारा कराया गया।
बच्चों ने हास्य प्रणाम, हास्य व्यायाम, ताली हास्य, कपोल हास्य, दंड बैठक हास्य, शाबाशी हास्य, बाल-मचलन हास्य, लस्सी हास्य जैसे अभ्यासों के माध्यम से शरीर को तंदुरुस्त रखने के अभ्यास सीखें।

इससे पूर्व मध्य प्रदेश के योगी नीरज, बलरामपुर के योग प्रशिक्षक प्रत्यांश सिंह, देव संस्कृति विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त योगाचार्या बबीता मौर्य, हाइम योग की योग प्रशिक्षिकाक नूपुर गुप्ता सहित प्रिंस रंजन बरनवाल द्वारा बच्चों की शारीरिक – मानसिक मजबूती, संतुलन, एकाग्रता, तनाव – अवसाद प्रबंधन एवं सकारात्मकता एवं आत्मविश्वास को बढ़ाने वाले योगासनों, प्राणायामों, मुद्राओं आदि को अपनी-अपनी कक्षाओं में सिखाया। इस कार्यक्रम में दिया लखनऊ की निधि वर्मा द्वारा बच्चों को यज्ञ के विज्ञान के बारे में जानकारी देते हुए विगत 26 मई को सूक्ष्म यज्ञ करने का प्रशिक्षण दिया था।

प्रतिभाग करने वाले बच्चों के अभिभावकों का मानना है कि इन कक्षाओं के माध्यम से बच्चों के डेली रूटीन में अंतर आया है अब वे निश्चित समय पर सोने एवं जगने लगे हैं, भूख में वृद्धि हुई है तथा चिड़चिड़ाहट, गुस्से में कमी हुई है वहीं पढ़ाई में भी बच्चों का ध्यान अब ज्यादा लगने लगा है।
उन्हें इन कक्षाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति के आधार योग, यज्ञ एवं संस्कार को समझने का अवसर मिला है।

हाइम योग के संस्थापक प्रिंस रंजन बरनवाल ने बताया कि इस वर्चुअल योगाभ्यास शिविर का समापन 31 मई को किया जाएगा। इस शिविर में 6 से 17 वर्ष तक 50 से भी अधिक बच्चों ने प्रतिदिन प्रतिभाग किया है। समापन अवसर पर प्रत्येक बच्चे को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया जाएगा, साथ ही संगीत संध्या के माध्यम से योग, यज्ञ एवं संस्कार की वैज्ञानिकता से रुबरु कराया जाएगा।

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