Gonda Colonelganj News:वाह्य प्राणायाम के अभ्यास से शरीर में ऑक्सीजन की खपत कम होती है:योगाचार्य आदर्श कुमार

एसपी सिंह / ज्ञान प्रकाश मिश्रा

करनैलगंज(गोंडा)। बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच लोगों को सबसे ज्यादा प्राणवायु ऑक्सीजन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को करनैलगंज क्षेत्र के निवासी पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के योगाचार्य आदर्श कुमार मिश्र ने इस समस्या के निजात के लिए लोगों को प्राणायाम के बारे में बताया। जिसे अपनाकर काफी हद तक लोग स्वस्थ हो सकते हैं। उन्होंने बताया ऑक्सीजन के साथ कुछ जहरीले तत्व भी शरीर में पहुंचते हैं। इन तत्वों को बाहर निकालने के लिए वाह्य प्राणायाम बहुत जरूरी है।

वाह्य प्राणायाम के अभ्यास के लिए कपालभाति अभ्यास के पश्चात सिद्धासन या पद्मासन में विधि पूर्वक बैठे, रीड की हड्डी को सीधा रखें। 3 से 5 सेकंड में स्वास सहजता पूर्वक अंदर भरे और इतने ही समय में बाहर छोड़कर सांस रोक लें। सांस को बाहर छोड़ने के साथ तीन बंध लगाएं। तकरीबन 20 से 25 सेकंड में एक चक्र पूरा हो जाता है। जब सांस अंदर लेना हो तब तीनों बंध को ढीला छोड़ दें। इसी क्रिया को 3 से 5 चक्र पूरा करें।आवश्यकतानुसार 11 से 21 चक्र तक अभ्यास कर सकते हैं। बाह्य प्राणायाम प्राणवायु को बाहर रोककर वाह्य कुंभक से किया जाने वाला अभ्यास बाह्य प्राणायाम कहलता है। वाह्य प्राणायाम त्रिबंन्ध के साथ किया जाता है। इंद्री को अंदर व ऊपर खींचना मूलबंध कहलाता है। पेट को अंदर खींच कर नाभि को पीठ से हटाने का प्रयास उड्यनबंध है। टूड्डी को गले के गड्ढे से मिलाने का प्रयास जालंधर बंध कहा जाता है। इन तीनों बन्धों को एक साथ लगाने को महाबंध कहते हैं। जब भी ऑक्सीजन की कमी महसूस हो तत्काल पेट के बल लेट कर गहरी सांस लेकर छोड़ने का प्रयास करें और कपूर लोंग को कपड़े में बांधकर थोड़े-थोड़े समय पर सूंघते रहें।

वाह्य प्राणायाम के अभ्यास से शरीर में ऑक्सीजन की खपत कम होती है। शरीर की ऊर्जा कम खर्च होती है। तनाव जन्य उत्तेजना कम होती है। बुद्धि शुक्ष्म होती है। आयु वृद्धि होकर व्यक्ति कुंडली जागरण की तरफ बढ़ता है। सामान्यतः यह दोष रहित प्राणायाम है। कोरोना मरीज कुछ ठीक होने के पश्चात ही इसका अभ्यास करें। मन की चंचलता दूर होगी उदर रोग समाप्त होंगे। यौन रोग पाइल्स, फिस्टुला भगन्दर में भी लाभकारी प्राणायाम है।
शुद्ध और ताजा भोजन लेना ही श्रेयस्कर है। मांसाहार से परहेज करना ही ठीक है। इसके विकल्प के तौर पर सोया को लिया जा सकता है। भारतीय खानपान संस्कृति में शाकाहार से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। खाने में विटामिन-सी से भरपूर सामाग्री का इस्तेमाल करें। नींबू, संतरा और आंवले का इस्तेमाल किया जा सकता है। तुलसी, गिलोय और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर दिन में तीन से चार बार लेना चाहिए। इससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है। संभव हो तो घर में हवन सामग्री में गाय का घी, गूग्गल और कपूर मिलाकर यज्ञ करें। इसके धुएं से घर में किसी भी तरह का बैक्टीरिया अथवा वायरस मर जाएगा।

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