Gonda Colonelganj News:कोरोना काल में जहां लोग अपनों की भी मदद करने से कतरा रहे हैं वहीं देवदूत और वानर सेना नि:स्वार्थ भाव से लोगों की चौबीसों घंटे मदद कर रही है

एसपी सिंह / ज्ञान प्रकाश मिश्रा

करनैलगंज(गोंडा। कोरोना काल में जहां लोग अपनों की भी मदद करने से कतरा रहे हैं वहीं देवदूत और वानर सेना नि:स्वार्थ भाव से लोगों की चौबीसों घंटे मदद कर रही है। कोरोना काल में जब लोग अपनों की भी मदद करने में काफी सोच विचार कर रहे हैं ऐसे में पिछड़ा वर्ग आयोग कानपुर के एडिशनल डायरेक्टर अजीत सिंह ने देवदूत और वानर सेना बना कर लोगों की मदद करने का बीड़ा उठाया है। जिसमें अब तक दस हजार से अधिक लोग शामिल होकर लोगों की हर प्रकार से मदद कर रहे हैं। करनैलगंज कोतवाली में तैनात रह चुके प्रभारी निरीक्षक दिवाकर सिंह भी इस कार्य में जुड़े हुए हैं। दिवाकर सिंह ने बताया कि हम लोगों ने जरूरतमंदों की मदद करने के लिए सोशल मीडिया को अपना माध्यम बनाया है। उन्होंने बताया कि अजीत सिंह की पहल पर पूरे देश में हजारों लोग देवदूत और वानर सेना बन कर जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। किसी को रेमडीसिविर इंजेक्शन की जरूरत हो, ऑक्सीजन की जरूरत हो, बेड की जरूरत हो या प्लाज्मा की। देवदूत चौबीसों घंटे मदद के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी किसी भी सहायता के लिए लोगों को सोशल मीडिया पर पोस्ट डालनी होती है। इसे देखकर देवदूत और वानर सेना तत्काल हरकत में आ जाती है और जरूरतमंद को तत्काल सहायता पहुंचाई जाती है। उन्होंने बताया कि देवदूत और वानर सेना केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न प्रदेशों में भी कार्य कर रही है और नि:स्वार्थ भाव से लोगों की मदद कर रही है। उन्होंने बताया कि इसके एडमिन अजीत सिंह एडिशनल डायरेक्टर पिछड़ा वर्ग आयोग कानपुर तथा संरक्षक राजेश बहुगुणा सेवानिवृत्त आयुक्त मध्य प्रदेश सहित अनिल सिंह अपर आयुक्त आयकर विभाग कानपुर, मंजीत कौर समाज सेविका कानपुर, रमेश दुबे व्यवसाई एवं समाज सेवक लखनऊ, नीलेश सिंह पत्रकार दिल्ली, रत्नप्रभा सिंह उत्तराखंड, आकाश सिंह बादल, राहुल यादव, सुरजीत सिंह जेलर, राजा सिंह उड़ीसा, नारायण सिंह, आदित्य सिंह हंटर, भूपेंद्र तिवारी, उमेश मिश्र, दिवाकर सिंह इंस्पेक्टर बरेली आदि सहित लगभग दस हजार लोग इस कार्य में लगे हुए हैं। दिवाकर सिंह ने बताया कि अब तक अधिकांशतः शहरी क्षेत्र के लोग ही देवदूत और वानर सेना के माध्यम से अपनी जरूरतें पूरी कर पाते हैं। लेकिन हम लोगों की सोच है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकें इसलिए इसका प्रचार प्रसार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पीड़ित अथवा अन्य किसी से कोई भी आर्थिक सहयोग नहीं लिया जाता है। पीड़ित पक्ष यदि चाहे तो धन्यवाद पत्र दे सकता है वही हमारे लिए पर्याप्त होता है।

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